सौरभ गंगवार
रूद्रपुर । उधम सिंह नगर में अवैध कालोनाईजर के आगे जिला विकास प्राधिकरण बौना साबित हो रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण है कि लालपुर क्षेत्र में तीन अवैध कालोनियां नीलकंठ फेस 1,नीलकंठ फेस 2,नीलकंठ फेस 3 काट रहे कालोनाइजर जोधा सिंह रावत के खिलाफ कमिष्नर के आदेष के बेअसर साबित हो रहे हैं, प्राधिकरण अवैध कालोनाईजरों के खिलाफ कार्रवाई से कतरा रहा है, जिसके चलते भू माफियाओं के हौंसले बुलंद हैं, और कायदे कानूनों को ताक पर रखकर खेती वाली भूमि पर अवैध रूप से कालोनियां काटी जा रही है।
उधम सिंह नगर में आने वाला समय ऐसा होगा जब खेती के लिए जमीन नहीं बचेगी ग्रीन जोन में रखे जाने के बाद भी धडल्ले से खेती वाली जमीनें बिल्डर्स के हाथों बेची जा रहीं हैं, बता दें ग्रामीण क्षेत्रों में काटी गयी कालोनियों पर विकास शुल्क नहीं देना होता है, कई स्थानों पर कृषि की भूमि को 143 में बदले बिना ही मकान का निर्माण किया जा रहा है, पहले शहरों में कालोनियां काटी जा रही थीं पर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी भू माफियाओं ने कृषि को खुर्द बुर्द करना शुरू कर दिया है, इसका सबसे बड़ा कारण कर बचाना है, नियमानुसार कालोनी बनाने के लिए सरकार को टैक्स देना होता है, और जिला विकास प्राधिकरण जाकर नक्शा पास कराने के साथ ही अन्य जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं, प्राधिकरण के नियमानुसार कालोनी में जनता को चौड़ी सड़क,पार्क,मंदिर,गाड़ी मोड़ने की जगह,जल निकासी और बिजली आदि की व्यवस्था देनी होती है।
बिल्डर्स ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में सरकारी नियमों की अनदेखी करते हैं, और लोग भी आंख मूदकर जमीन खरीद लेते हैं,नगर में तो विकास प्राधिकरण का डर लगा रहता है,और ग्रामीण क्षेत्रों में अनुमति की कोई जरूरत नहीं होती क्योंकि अभी कोई नियम नहीं भू माफिया इसलिए इसे ही विकास का और सस्ता तरीका मान गांवों का रुख कर रहे हैं, सबसे पहले कालोनियों को 143 की जांच का आदेश दिया जाना चाहिए क्योंकि कृषि भूमि को अकृषि भूमि में बदले बिना निर्माण नहीं किया जा सकता है, पंतनगर विश्वविद्यालय जो कि कृषि का रिसर्च सेंटर था आज अपनी साढ़े सात हजार से अधिक कृषि की जमीन सिडकुल और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए दे चुका है,11000 एकड और 1000 एकड़ के लगभग प्राग फार्म और खुरपिया फार्म की जमीन अब तहस नहस हो रही है।
विकास के नाम पर ग्रीन जोन अब कंक्रीट जोन बन रहा है आने वाले समय में खेती की जमीन बचेगी नहीं क्योंकि कोई नियम कानून नहीं कृषि भूमि को अकृषि में बदले बिना बनाई जा रही कालोनियो की जिले में बाढ़ आ गयी है, कई कालोनाईजर मानकों को ताक पर रखकर धडल्ले से जमीनों को खुर्द बुर्द कर रहे हैं, इन्हीं में एक कालोनाईजर जोधा सिंह रावत भी हैं,नीलकंठ फेस-1, फेस-2 और फेस 3 के नाम से इस कालोनाइजर की लालपुर में ही तीन कालोनियां बन रही हैं, लेकिन प्रशासन ने आंखों पर पट्टी बांध रखी हैं, पिछले दिनों कमिश्नर दीपक रावत ने भी इस कालोनाइजर के खिलाफ जांच के आदेश दिये थे लेकिन अभी तक कालोनाइजर के खिलाफ जिला विकास प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की है।।
