आखिर कब तक बदहाली का दंश झेलता रहेगा काशीपुर

आर. पी. उदास

काशीपुर । एक जमाने में कुमाऊं के सबसे विकसित शहर में गिना जाने वाला काशीपुर पिछले लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा के कारण बदहाली का दंश झेल रहा है। जिसे लेकर लोगों में काफी आक्रोश है।

एक जमाना ऐसा भी था जब उत्तराखंड का प्रवेश द्वार कहलाने वाला काशीपुर विकास के मामले में कुमाऊं मंडल में टॉप पर गिना जाता था। विकास पुरुष के नाम से विख्यात स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी के प्रयास से काशीपुर को औद्योगिक नगरी भी कहा जाता था , सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों के साथ ही यहां आई आई एम जैसे संस्थानों की भी स्थापना हुई । अब पिछले कई वर्षों से घोर राजनीतिक उपेक्षा के कारण अब सुविधाएं कम और समस्याएं ज्यादा नजर आती हैं। पिछले करीब 5 सालों से निर्माणाधीन ओवरब्रिज ने तो जैसे शहर की सूरत बिगाड़ कर रख दी है तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक हरभजन सिंह चीमा के प्रयास से बन रहा ओवरब्रिज हालांकि शहर में यातायात व्यवस्था की सेहत सुधारने के लिए बन रहा है परंतु इसके निर्माण की कछुआ गति के कारण यही ओवरब्रिज वर्तमान में लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। राजनैतिक अनदेखी और अधिकारियों की लापरवाही के कारण निर्माण की गति काफी सुस्त है जिसकी वजह से यातायात तो बड़ी समस्या है ही यहां का व्यापार भी चौपट हो गया है। इस समस्या के अलावा शहर की खस्ताहाल सड़कें यहां के पर्यटक स्थलों की बदहाली विकास को मुंह चढ़ा रही है। काशीपुर के तीर्थ द्रोणासागर और गिरीताल के सौंदर्य करण की योजनाएं लंबे समय से कागजों पर तो बन रही हैं परंतु वास्तव में दोनों ही पर्यटक स्थल बदहाल अवस्था में हैं शहर की कई प्रमुख सड़कें जर्जर अवस्था में है पानी की निकासी की उचित व्यवस्था ना होने के कारण बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या पिछले लंबे समय से लोगों की परेशानी का सबब है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए चंपावत की सीट छोड़ने वाले नवनियुक्त वन विकास निगम के चेयरमैन कैलाश गहतोड़ी ने दावा किया है कि अब काशीपुर का विकास किया जाएगा काशीपुर को जिला बनाने का मुद्दा भी वह मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे श्री गहतोड़ी काशीपुर के निवासी हैं इसलिए यहां के लोगों उनसे काफी अपेक्षाएं भी हैं वह अपने दावों और यहां के लोगों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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