कृषि श्रमिकों की समस्या का विकल्प है धान की सीधी बुवाई:- रत्नप्रभा सिंह

रिपोर्ट प्रमोद कुमार

रुद्रपुर।कृषि प्रधान प्रांतों में श्रमिकों का अभाव बहुत बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है, श्रमिकों के अभाव में धान का रोपण कार्य संभव नहीं ये किसानों के लिए चिंता का विषय है,इसके लिए पंतनगर विवि के वैज्ञानिकों ने धान की सीधी बुवाई का विकल्प किसानों को सुझाया है,आमतौर पर धान की खेती कदेड़(लेव) लगाकर रोपण विधि से कई जाती है,जिसमें अधिक श्रमिकों की जरूरत पड़ती है,ऐसी स्थिति में धान उत्पादन की सीधी बुवाई तकनीक को अपनाकर किसान कम श्रमिकों के उपयोग और पानी की बचत कर वही उत्पादन प्राप्त कर सकता है,जो रोपण विधि की खेती से करते हैं।

पंतनगर विवि के फसल अनुसंधान केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ एस के वर्मा के अनुसार धान की सीधी बुवाई में खरपतवारों की सघनता अधिक होती है,सीधी बुवाई में नर्सरी और लेव(कदेड़) की जरूरत नहीं होती है,और रोपाई की भी आवश्यकता नहीं होती है,इस विधि में गेंहू की तरह ही खेत तैयार कर कुछ ही समय में बड़े प्रक्षेत्र में बुवाई की जा सकती है, इसमें 25 से 30 प्रतिशत पानी की भी बचत की जा सकती है, इसमें कम श्रमिक, कम डीजल और कम पानी में अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, आम गुठलियों के दाम की कहावत धान की सीधी बुवाई के लिए उपयुक्त साबित होती है।

आजकल श्रमिकों के अभाव को ध्यान में रखते हुए धान की सीधी बुवाई तकनीक को अपनाना लाभकारी सिद्ध होगा यदि सीधी बुवाई वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो तीन से पांच प्रतिशत तक अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है, इतना ही नहीं इसमें 10 दिन पहले ही फसल परिपक्व हो जाती है,
धान की सीधी बुवाई के लिए खेत समतल होना चाहिए ताकि सीडड्रिल समान रुप से बीज व खाद गिराए बुवाई का समय जून मध्य होगाताकि बारिश से पूर्व पौधा पूरी तरह स्थापित हो जाए नमी बेहद जरूरी है। बीज 2,3 सेमी की गहराई पर ही बोना चाहिए बोने के 2,3 दिन के भीतर ही खरपतवार नाशक का प्रयोग करना चाहिए यदि जमाव सही न हो तो सिंचाई के बाद खेत से ही कुछ पौधे उखाड़ कर रिक्त स्थान पर रोप दें जिंक की कमी के लक्षण दिखाई देने पर 0.5%जिंक सल्फेट में 0.2% यूरिया का घोल बनाकर पानी के साथ फसल पर छिड़काव करें।।

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