* (आर. पी.उदास)*
आम जनमानस के लिए अच्छे दिनों का भरोसा दिला कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में इन दावों के विपरीत लोग चौतरफा महंगाई और बेरोजगारी के बोझ तले दबकर रह गए हैं ,रोजमर्रा मे काम आने वाले जरूरी खाद्य पदार्थों और रसोई गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने आम जनमानस की कमर तोड़ कर रख दी है ।
पिछले काफी समय से लोग एक के बाद एक जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ जाने से बेहद परेशान हैं, जीवन यापन के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों जैसे तेल ,रिफाइंड ,दालों, सब्जियों ,चीनी, चायपत्ती, बिस्कुट , नमकीन आदि विभिन्न वस्तुओं के दाम गुपचुप रूप से बढ़ते जा रहे हैं जिन डिब्बाबंद और पैकेट बंद वस्तुओं के दाम नहीं बढ़े हैं उनकी मात्रा कम करके लोगों की जेब ढीली की जा रही है। बढ़ती महंगाई के बीच खराब गुणवत्ता और मिलावट का खेल भी खेला जा रहा है ।अन्य वस्तुओं के साथ ही तमाम जीवन रक्षक दवाइयों के दाम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं ,इसके अलावा रेडीमेड गारमेंट्स व कपड़ों के दामों में भी कई गुना तक वृद्धि हो गई है और लोगों के सामने पेट भरने के साथ ही तन ढकने की भी दिक्कतें खड़ी हो गई हैं ।पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल डीजल के दाम तो स्थिर हैं परंतु रसोई गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है ,वर्तमान में रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत करीब 11 सौ हो गई हैऔर गरीब आदमी के लिए सिलेंडर भरवा पाना मुश्किल हो गया है। चौतरफा महंगाई के बीच बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है , कोरोना काल में सैकड़ों लोग रोजगार गवाने के बाद अपने घरों में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं ,पढ़े-लिखे युवा नौकरी पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं परंतु कामयाबी नहीं मिल रही है जिससे युवा वर्ग अजीब सी मानसिक कुंठा जेल रहा है । गंभीर बात तो यह है कि बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने के प्रति सरकार की ओर से अभी तक कोई सार्थक पहल नहीं की जा रही है , विपक्षी राजनीतिक दल भी इसका विरोध मीडिया के कैमरों के सामने तो करते हैं परंतु वास्तव में जनता के साथ खड़े नजर नहीं आते। हालात यही रहे तो आम जनमानस के दिलों में धधक रही गुस्से की आग किसी दिन ज्वालामुखी बनकर फूटेगी।