तो क्या मुनाफे के लिए जबरन जहर परोसा जा रहा है लोगों को

दीपा यादव

आपने वह कहावत तो सुनी होगी कि “अपना काम बनता ,भाड़ में जाए जनता” गुटखा ( पान मसाला) बेचने वाली कंपनियां और व्यापारी आजकल इसी कहावत को चरितार्थ करने में जुटे हैं, अपने मुनाफे के लिए गुटखे के साथ तंबाकू जबरन बढ़ाया जा रहा है।
संज्ञान में आया है की विभिन्न नामों से बाजार में मिलने वाले गुटखा (पान मसाला) के साथ ग्राहकों को जर्दा (तंबाकू )का पाउच जबरदस्ती भिड़ाया जा रहा है । गुटखे के तमाम शौकीन जर्दा साथ में भी मांगते हैं ,परंतु ऐसे लोगों की संख्या भी काफी है जो बिना तंबाकू मिलाएं गुटखा खाने का शौक रखते हैं परंतु दुकानदार जबरदस्ती तंबाकू का पाउच देते हैं या फिर तंबाकू के पैसे लेकर गुटखा देते हैं। खोजबीन के बाद जो मामला सामने आया वह अपने मुनाफे के लिए ग्राहकों की जेब पर डाका डालने का है। गुटखे की कीमत ₹4 है जो उस पर अंकित भी है परंतु तंबाकू का छोटा पाउच साथ में देने के बाद ₹5 में दिया जाता है अगर कोई व्यक्ति बिना तंबाकू के गुटखा लेना चाहे तो भी उससे ₹5 ही लिए जाते हैं। छोटे दुकानदार जैसे खोखा ठेला वाले कहते हैं कि थोक व्यापारी उन्हें बिना तंबाकू पाउच के गुटखा नहीं देते बड़े व्यापारियों का कहना है कि जैसे कंपनी से आता है वैसे ही वह आगे भी बेचते हैं ।इस मामले में गौरतलब बात यह है कि पहले जर्दा मिला हुआ गुटखा आता था बाद में जर्दा और गुटखे के पाउच इसी उद्देश्य से अलग अलग किए गए थे कि जो व्यक्ति जर्दा खाना पसंद नहीं करता वह केवल गुटका भी खरीद सकता है ,परंतु मुनाफाखोरी कि लोगों को ऐसी आदत लगी है कि उन्हें अपने फायदे के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता ।इस मामले में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अपने फायदे के लिए लोगों को जबरन जहर परोसा जा रहा है।

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