भूपेंद्र सिंह
भूपेंद्र सिंह
काशीपुर। काशीपुर में ही नहीं अन्य क्षेत्रों में भी यह कहावत कि “ऊंची दुकान-फीके पकवान” एकदम सटीक बैठती है क्योंकि यहां लोगों ने अपनी बिल्डिंग तो तिमंजले तक बना रखी है परंतु गाड़ी खड़ी करने के लिए पार्किंग तक की जगह नहीं छोडी है। उनकी गाड़ियां सड़कों पर खड़ी रहती हैं। जिससे आने जाने वाले वाहनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
काशीपुर में कई ऐसी कॉलोनी है जिनमें सडके बहुत छोटी हैं। लेकिन वहां मकान बनाने वाले अपनी रहीसी दिखाते हुए तिमंजिला मकान बनवाते हैं और रहीसी का आलम यह है कि वे लोग अपनी जमीन में पार्किंग न बनवा कर अपनी गाड़ियां छोटी-छोटी सड़कों पर खड़ा कर देते हैं। जिससे उन सड़कों पर आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन हमारा नगर निगम व सहायक परिवहन निगम इस ओर से बिल्कुल आंखें मूंदे पड़ा है। अतिक्रमण के नाम पर वैसे तो जगह-जगह बुलडोजर चल रहे हैं लेकिन इन छोटी सड़कों पर खड़ी गाड़ियां क्या अतिक्रमण में नहीं आती। जो सुबह से रात और रात से सुबह तक सड़कों पर खड़ी रहती हैं । मेन बाजार में सड़कों पर खड़ी मोटरसाइकिल पर भी चालान कर दिया जाता है परंतु क्या गलियों में खड़ी चार पहियो की गाड़ी पर क्या कोई चालान का प्रावधान नहीं है?