पिता की दरिंदगी का शिकार हुई बेटी को मिला न्याय

 अमित अग्रवाल

हल्द्वानी। नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को कोर्ट ने 20 साल के कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को जिला विधिक बोर्ड से चार लाख की प्रतिकर धनराशि दिलाए जाने के आदेश दिए हैं।

मामला वर्ष 2019 का है। पौड़ी गढ़वाल का रहने वाला एक व्यक्ति सितंबर 2019 में भीमताल में दूसरी पत्नी और दो बेटियों के साथ किराये पर रह रहा था। इनमें एक बेटी पहली पत्नी से थी। 25 सितंबर 2019 को पिता ने पहली पत्नी की 11 वर्षीय पुत्री को दरिंदगी का शिकार बनाया और फरार हो गया। परिवार के डर से किशोरी घर में चुप रही लेकिन उसने अपनी आपबीती स्कूल पहुंचकर शिक्षिका को बता दी।

26 सितंबर 2019 को भीमताल थाने में शिक्षिका की ओर से आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धारा 376 (3) के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए स्थानीय लोगों समेत राजनैतिक लोगों ने थाने का घेराव भी किया था।
इधर, पुलिस लगातार दबिश दे रही थी लेकिन आरोपी का पता नहीं चल पा रहा था। घटना के 22 दिन बाद 17 अक्तूबर 2019 को पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 18 नवंबर 2019 को मामला कोर्ट पहुंचा और चार जनवरी 2020 से मामले की सुनवाई शुरू हुई। पीड़िता की ओर से न्याय की लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी एडीजीसी (फौजदारी) ने किशोरी के पक्ष में कोर्ट के सामने 18 जनवरी 2020 को साक्ष्य पेश करना शुरू किया। मामले की तारीखें बढ़ती रहीं और किशोरी को न्याय का इंतजार था।
वहीं कोर्ट में पेश हुए आरोपी की दरिंदगी के सभी सबूत और गवाहों को देखते हुए कोर्ट ने 11 जुलाई 2022 को फैसला सुरक्षित किया और 25 जुलाई 2022 को आरोपी पिता को अपराधी मानते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो/अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी नंदन सिंह ने 20 साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से चार लाख रुपये प्रतिकर दिलाने के आदेश भी दिए हैं।

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