मंडलायुक्त के हस्तक्षेप के बाद कुंभकरण की नींद से जागा प्रशासन

रुद्रपुर। महानगर में एनएच 74 के पास करोड़ों की जमीन अतिक्रमण को आखिर प्रशासन ने कब्जा मुक्त करा लिया तहसीलदार और सहायक नगर आयुक्त ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जमीन को खाली कराने के साथ समान जप्त कर लिया है, तहसीलदार ने शीघ्र ही जमीन की ताडवाड कराने के निर्देश भी दिए है।

शुक्रवार को तहसीलदार नीतू डागर और सहायक नगर आयुक्त राजसी दल बल के साथ रम्पुरा में भूतबंगला के समाने एच 74 के पास भूमाफिया द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे को खाली कराने पंहुचें दोनों अधिकारियों के निर्देश पर टीम ने जमीन पर हुए अतिक्रमण को जेसीबी से ध्वस्त कर कुछ सामान जप्त लिया आचनक हुई कार्रवाई से भूमाफिया के होश उड़ गये है,तहसीलदार नीतू डागर ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जे करने वाले भूमाफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी उन्होंने बताया कि खाली कराई गयी जमीन पर तारबाड़ करके वोर्ड लगाया जायेगा यदि भूमाफियाओ ने फिर जमीन पर कब्जे की कोशिश की तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

सरकारी जमीन को बचाने के लिए पूर्व सभासद रामबाबू काफी समय से लड़ रहे लडाई

जिस जमीन को प्रशासन की टीम ने कब्जा मुक्त कराया है,उसे भूमाफियाओ से बचाने के लिए पूर्व सभासद काफी समय से संर्घस कर रहे थे उन्होंने जमीन पर 2021 में शुरू हुए निर्माण की शिकायत पिछले वर्ष नगर निगम से की थी, लेकिन नगर निगम ने इसे गंभीरता से नहीं लिया तो उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत की थी,जिला अधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त ने जांच की तो पूर्व सभासद सलीम अहमद,निगम के ठेकेदार किशन सुखीजा और अरसद खान का कब्जा पाया गया निगम ने इसके बाद नोटिस जारी कर जमीन तीन दिन में खाली करने के निर्देश दिए थे लेकिन इसके बाद यह मामला फिर ठंडे वस्ते में डाल दिया गया बताया जाता है कि इस दौरान खाली पड़ी जमीन पर भूमाफियाओं ने कई निर्माण भी करा दिये दो माह पूर्व पूर्व सभासद रामबाबू ने फिर डीएम ऊधमसिंहनगर को इसकी शिकायत कर नगर आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

जिस पर डीएम ने एसडीएम को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए डीएम के आदेश के एक माह बाद एसडीएम ने तहसीलदार नीतू डागर को मौके पर भेजा था, तहसीलदार की जांच के बाद फिर यह मामला ठंडा पड़ गया इधर पूर्व सभासद रामबाबू ने पिछले दिनों ऊधमसिंहनगर दौरे पर आये मंडलायुक्त दीपक रावत के समक्ष मामला उठाया नगर आयुक्त की पोल खोल दी बताया जाता कि मंडलायुक्त ने सरकारी जमीन को खाली कराने में हो रही हीलाहवाली पर नाराजगी जताई थी जिसके बाद हरकत में तहसील प्रशासन और नगर निगम ने जमीन को भूमाफिया से मुक्त कराया है, हालांकि जमीन का काफी हिस्सा अभी भी भूमाफियाओं के कब्जे में है उन्होंने नगर निगम की हीलाहवाली के बीच करोड़ों की जमीन पर पक्के मकान बना लिया है, जिन्हें निगम की तरफ पुराने निर्माण बताने की दलील दी जा रही है, जबकि सैटेलाइट से साफ पता चल रहा कि निर्माण 2021 और 22 में हुए है।।

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