Amit Agarwal
लालकुआं। एशिया की सबसे बड़ी पेपर कंपनी सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल लालकुआं में स्थापित होने से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी थी कि इस मिल के लगने के बाद यहां रोज़गार और व्यापार की समस्या काफी हद तक हल होगी, लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि यह मिल क्षेत्रवासियों के लिए मात्र प्रदूषण और बीमारियों का कारण बनकर रह जायेगी। और आज तक लालकुआं के हाथ बीमारियों के अलावा कुछ भी नही लग पाया है।
सेन्चुरी पेपर मिल लालकुआं के द्वारा फैलाये जा रहे जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण की वजह से यहां के लोगों की जिन्दगी नर्क बनकर रह गयी है। वहीं लोगों के स्वास्थ्य के लिए जबाबदेह प्रशासन तथा प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिम्मेदार पर्यावरण विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने का मतलब नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बनकर रह जाना है। सेंचुरी पेपर मिल से चौबीस घंटे निकलने वाले धुंऐं और कोयले की राख और प्रदूषित जल ने ना जाने कितने लोगों को बीमारी के कगार पर खड़ा कर दिया है।
वहीं इस मिल से सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में लालकुआं, बिन्दुखत्ता और शांतिपुरी सहित आसपास के लोग शासन-प्रशासन से गुहार लगा-लगाकर थक चुके हैं, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन एवं प्रदुषण विभाग द्वारा अभी तक इसके विरुद्ध कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।