सौरभ गंगवार
रुद्रपुर। भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम पुष्कर सिंह धामी के सख्त एक्शन के बावजूद जिले में भ्रष्टाचार की जड़े गहरी होती जा रही है। रूद्रपुर का रजिस्ट्रार कार्यालय इसका जीता जागता उदाहरण है। भ्रष्ट अधिकारियों ने इस विभाग को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। यहां बिना कमीशन के कोई काम नहीं होता आलम यह है कि रजिस्ट्रार कार्यालय के मुखिया खुद ही भ्रष्टाचार में आंकठ डूबे हुए हैं। वह खुद को मुख्यमंत्री का खास बताकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं।
भाजपा सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के दावे कर ले लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कई विभागों में भ्रष्टाचार की जड़ी इतनी गहरी हो चुकी हैं कि उन्हें उखाड़ना शायद सरकार के बस की भी बात नहीं रूद्रपुर के रजिस्ट्रार कार्यालय में ही देख लीजिये यहां करीब एक साल पहले किच्छा से स्थानांतरित होकर आये रजिस्ट्रार के संरक्षण में भ्रष्टाचार खूब फल फूल रहा है। बताया जाता है कि रजिस्ट्रार खुद को मुख्यमंत्री का खास बताते हैं। इसीलिए वो खुलेआम कमीशन का गेम खेलते हैं। बताया जाता है कि रजिस्ट्रार ने कार्यालय में कमीशन खोरी के लिए आधा दर्जन निजी लोग रखें हुए हैं। रजिस्ट्रार के ये निजी कर्मचारी सेटिंग गेटिंग में माहिर हैं। रजिस्ट्रार अपनी पहुंच के चलते दबंगई से भी नहीं चूकते बीते दिनों रजिस्ट्रार के उत्पीडन और मनमानी से तंग अधिवक्ता और दास्तावेज लेखकों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन भी किया था यही नहीं बताया जाता कि रजिस्ट्रार ने एक अधिवक्ता व एक महिला दास्तावेज लेखक से अभद्रता भी की थी बताया जाता है कि जो ज्यादा चढ़ाव देता उसे ज्यादा और जो कम चढ़ावा देता है उसे रजिस्ट्रार कम तब्बजों देते है। यानी के आम चढ़ावा देने वालों के काम में भी भेदभाव किया जाता है।

सूत्रों की मानें तो एक रजिस्ट्री पर रजिस्ट्रार कार्यालय में सरकारी खर्च के अतिरिक्त दो प्रतिशत चढ़ावा खुलेआम लिया जाता है,जिनकी रजिस्ट्री एक नम्बर की होती है। इसके इतर जिन कालोनियो पर विकास प्राधिकरण ने रोक लगा रखी है, उसके विल्डरों से एक मुश्त मोटी रकम ली जाती हैं। साथ ही उनकी रजिस्ट्री पर दो की जगह चार प्रतिशत कमीशन वसूल की जाती है। पैसे का चढ़ावा आने पर रजिस्ट्रार साहब विवादित भूखंड और जमीनों की रजिस्ट्री भी कर देते हैं। अगर आपको रजिस्ट्री की नकल चाहिए तो उसे तत्काल देने के ऐवज में भी 310 रुपये वसूल किये जाते हैं। इसी प्रकार अगर आपको कोई दस्तावेज चाहिए तो उसकी डबल कीमत चुकानी होगी,वो भी बिना रसीद के बताया जाता है कि ये काम रजिस्ट्रार साहब ने आधा दर्जन निजी कर्मचारी करते हैं। चर्चा है कि प्राधिकरण के आदेश को ताक पर रखकर प्रीत विहार और लालपुर के पास स्थित नीलकंठ कॉलोनी की भी रजिस्ट्रीयां मोटी रकम लेकर की जा रही है। जबकि प्राधिकरण ने इस पर रोक लगा रखी है। बताया जाता कि पिछले वर्ष रजिस्ट्रार अभिनाश मिश्रा किच्छा से रुद्रपुर के लिए स्थानांतरित होकर आए जिले में वह पहले रजिस्ट्रार थे जिनका ट्रांसफर हुआ था, जिसके पीछे कलेक्टेड के एक बड़े अधिकारी की सिफारिश बताई जा रही थी।
फिलहाल खुद को मुख्यमंत्री का करीबी बताने वाले रजिस्ट्रार मुख्यमंत्री धामी की ही भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को धूल चटा रहे हैं। बहरहाल रजिस्ट्री कार्यालय में तैनात रजिस्ट्रार के कारनामे से जहां लोग परेशान हैं तो इससे सरकार के उस दावे की भी हवा निकल रही,जिससे सरकार विरोधियों पर वार करती है। पिछले कई दिनों से रजिस्ट्रार के खिलाफ अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखों ने मोर्चा खोल रखा है इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही एडवोकेट प्रमोद मित्तल,दानिश खान,दिवाकर पाण्डेय,सुनील कुमार,अशोक सागर,अनीता पंत,रोहित गड़ाकोटी,दिनेश पाण्डे,भजन बत्रा,निरंजन पंत,अबरार अली,लक्ष्मी नारायण सक्सेना,रवि श्रीवास्तव,राजेश विश्वास,वीरेंद्र कुशवाह,जगदीश सागर,दीपक कुमार,शेखर शर्मा आदि ने रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।।