हरिद्वार जिला अस्पताल में डेंगू पीड़ित मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़

हरिद्वार। उत्तराखंड की राज्य सरकार एक ओर जहां स्वास्थ्य महकमे को पटरी पर लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है ,वहीं हरिद्वार जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारी गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाकर ना केवल मरीजों के स्वास्थ्य खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि उनके तीमारदारों को भी मानसिक रूप से बीमार करने पर आमादा हैं।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार में और आसपास के क्षेत्रों में डेंगू रोग तेजी से पैर पसार रहा है ,इस खतरनाक रोग से पीड़ित मरीज काफी संख्या में इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं । पता चला है कि जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी इन मरीजों का ठीक से इलाज करने के बजाय गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए मरीजों के साथ आए तीमारदारों को परेशान करने पर आमादा हैं । मरीजों और उनके तीमारदारों ने बताया कि चिकित्सक सीधा कहते हैं कि अगर इलाज कराना है तो पहले ब्लड और प्लेटीलेट्स का इंतजाम करो वरना आपके मरीज को रेफर कर रहे हैं इसे इलाज के लिए एम्स ले जाओ। मरीज और उनके तीमारदार यदि महंगा इलाज ना करा पाने की दुहाई देते हैं तो चिकित्सकों का कहना होता है कि लिखकर दो कि हमारे मरीज को कुछ हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल और चिकित्सकों की नहीं होगी । इतना ही नहीं मेला अस्पताल के बाहर बने ब्लड बैंक के कर्मचारी तीमारदार के ब्लड और प्लेटीलेट्स की डिमांड करने पर तरह-तरह के बहाने बनाकर कहते हैं कि पहले डोनर को ढूंढ खोज कर लाओ तभी ब्लड मिल पाएगा । जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में बेड नंबर 19 ,20 और 22 पर भर्ती मरीज के तीमारदारों ने बताया कि उन्हें अस्पताल के कार्यालय में बुलाकर बार-बार धमकाया जा रहा है कि या तो यह लिखकर दो कि हमारे मरीज को कुछ हो जाता है तो हमारी जिम्मेदारी होगी वरना अपने मरीज को लेकर चले जाओ। अस्पताल में भर्ती मोनिका नाम की एक मरीज ने बताया कि बाहर से खरीद कर वह प्लेटीलेट्स की चार यूनिट लगवा चुकी हैं और अब उनकी हालत में कुछ हद तक सुधार भी है परंतु स्वास्थ्य कर्मचारी उन्हें और प्लेटीलेट्स यूनिट लाने की बात कहकर धमका रहे हैं कि प्लेटीलेट्स का इंतजाम नहीं किया तो उन्हें एम्स के लिए रेफर कर देंगे । एक मरीज के साथ आए तीमारदार ने बताया कि इस मामले में वो मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जिला अधिकारी और सीएमओ तक को लिखित रूप में शिकायत कर चुके हैं परंतु कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे डेंगू पीड़ितों के साथ स्वास्थ्य विभाग का यह रवैया ना केवल गैर जिम्मेदाराना है बल्कि राज्य सरकार की जनहितकारी स्वास्थ्य नीतियों को भी पलीता लगा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *