हरिद्वार

जिला कार्यालय सभागार में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की तैयारी को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह ने कहा कि जनपद में कृमि संक्रमण से एक भी बच्चा प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा निर्धारित मानकों के अनुसार खिलाई जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

जिलाधिकारी ने गंभीर कृमि संक्रमण के लक्षणों जैसे दस्त, पेट दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख न लगना आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि जितना अधिक संक्रमण होगा, लक्षण उतने ही गंभीर होंगे। उन्होंने डिवर्मिंग (कृमिनाशन) के फायदों की जानकारी देते हुए कहा कि इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, पोषण और स्वास्थ्य में सुधार होता है, एनीमिया पर नियंत्रण होता है और पढ़ाई में मन लगने के साथ-साथ उपस्थिति भी बेहतर होती है।

उन्होंने कहा कि एल्बेंडाजोल खाने के बाद बच्चों में कभी-कभी हल्के लक्षण नजर आ सकते हैं, जिनके बारे में अभिभावकों और बच्चों को पहले से ही जानकारी दी जानी चाहिए ताकि किसी प्रकार की अफवाह न फैले। कार्यक्रम की सफलता के लिए गहन मॉनिटरिंग और विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी बताया गया। शिक्षा व बाल विकास विभाग को समय से रिपोर्टिंग करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में जानकारी देते हुए अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आलोक तिवारी ने बताया कि 8 अप्रैल को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस और 16 अप्रैल को मॉप-अप दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान जनपद के स्कूलों, मदरसों और महाविद्यालयों में एल्बेंडाजोल की दवा बच्चों को दी जाएगी। जो बच्चे किसी कारणवश 8 अप्रैल को दवा नहीं ले पाएंगे, उन्हें 16 अप्रैल को मॉप-अप दिवस पर दवा खिलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि 1 से 2 वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की आधी गोली पानी में मिलाकर दी जाएगी, 2 से 3 वर्ष के बच्चों को पूरी गोली पानी में मिलाकर जबकि 3 से 19 वर्ष के बच्चों, किशोरों और किशोरियों को पूरी गोली चबाकर खिलाई जाएगी।

इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोंडे, एसीएमओ डॉ. आलोक तिवारी, जिला पंचायतराज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह, बाल विकास परियोजना अधिकारी वर्षा शर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इप्सिता रावत, डीपीएम निम्मी राणा समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।

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