**उत्तराखंड में रोप-वे विकास पर उच्चस्तरीय मंथन, छह प्रमुख परियोजनाओं पर रहेगा विशेष फोकस**

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में रोप-वे विकास से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेशभर में प्रस्तावित रोप-वे परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में राज्य में प्रस्तावित सभी रोप-वे परियोजनाओं को इसी समिति से अनिवार्य रूप से स्वीकृति लेनी होगी, ताकि विभिन्न एजेंसियों द्वारा बनाए जा रहे प्रोजेक्ट्स में किसी भी तरह की डुप्लीकेसी न हो। उन्होंने रोप-वे विकास समिति की पहली बोर्ड बैठक इस माह के अंत तक आयोजित करने और इसके लिए सचिव पर्यटन को सदस्य सचिव नामित करने के निर्देश दिए। साथ ही एनएचएलएमएल को एसपीवी का सीईओ एक सप्ताह में नियुक्त करने को कहा गया।

बैठक में बताया गया कि सरकार ने राज्यभर में कुल 50 रोप-वे प्रस्ताव भेजे हैं, जिनमें से छह परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चुना गया है। सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविन्दघाट–हेमकुण्ट साहिब रोप-वे के लिए कार्य आवंटन हो चुका है, जबकि काठगोदाम–हनुमानगढ़ी मंदिर रोप-वे अनुमोदन चरण में है। कनकचौरी–कार्तिक स्वामी, रैथल–बरसू–बरनाला और जोशीमठ–औली–गौरसों रोप-वे की डीपीआर तैयार करने और निविदा प्रक्रियाएं जारी हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि शुरुआत में इन छह परियोजनाओं पर ही विशेष फोकस किया जाए और प्रत्येक की टाइमलाइन तथा पर्ट चार्ट तैयार किए जाएं। उन्होंने वन एवं वन्यजीव स्वीकृतियों में तेजी लाने और रोप-वे निर्माण क्षेत्र तक भारी मशीनरी पहुंचाने में आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सड़कों के टर्निंग रेडियस बढ़ाने तथा पुलों को मजबूत करने के निर्देश भी दिए।

मुख्य सचिव ने काठगोदाम–हनुमानगढ़ी परियोजना में कैंचीधाम को भी शामिल करने को कहा। उन्होंने कहा कि कैंचीधाम में लगातार बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए वहां रोप-वे की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रूहेला तथा एनएचएलएमएल के प्रशांत जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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