हरिद्वार। सरस्वती शिशु मंदिर, सेक्टर–2, रानीपुर में मंगलवार को तृतीय सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम प्रेरणादायी एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मोहिनी ने किया। शुभारंभ कमलेश विल्सन द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके उपरांत उन्होंने एकल गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना गायत्री रावत ने रखी। उन्होंने महिलाओं के दायित्व, शक्ति तथा सप्तशक्ति संगम के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रस्तुत समूह गीत ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। कार्यक्रम का विषय “भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका” रहा। मुख्य वक्ता योगाचार्य डॉ. बबीता ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका निर्णायक है।
“कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण के संबंध में भारतीय दृष्टि” विषय पर राधिका नागरथ ने भारतीय परंपरा में परिवार और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर प्रेरणादायी जीवन के लिए संगीता राणा एवं डॉ. प्रिया आहूजा को विशिष्ट माताओं के रूप में सम्मानित किया गया।
चिपको आंदोलन की प्रेरणास्रोत गौरा देवी पर आधारित नाटक सरस्वती एवं गीता दीदी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन अंजली त्यागी ने किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में अनीता वर्मा ने मातृ शक्ति के संगठन, सामाजिक जागरूकता और समाज के उत्थान में उनके योगदान की सराहना की। अंत में नेहा जोशी ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित मातृ शक्तियों ने समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।