हरिद्वार। जिले में जड़ी-बूटियों की खेती और उनके उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर अश्वगंधा, जिसकी आयुर्वेदिक दवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका है, अब किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो रहा है। अश्वगंधा की खेती से किसान धान, गेहूं और मक्का की खेती के मुकाबले 50 फीसदी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
जिले के नोडल अधिकारी डॉ. अवनीश उपाध्याय ने बताया कि अश्वगंधा के फल, बीज और छाल का प्रयोग कई प्रकार की दवाइयों के निर्माण में होता है। यह तनाव और चिंता को दूर करने में बेहद फायदेमंद माना जाता है।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने बताया कि उत्तराखंड के आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग ने जनपद हरिद्वार के तीन गांवों को जड़ी-बूटी ग्राम घोषित किया गया है। इन गांवों के अब हर घर में जड़ी-बूटी के पौधे मिलेंगे। ग्राम बिहारीनगर को अश्वगंधा ग्राम, जगजीतपुर को तुलसी ग्राम, और भोगपुर को गिलोय ग्राम बनाया गया है।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में ग्राम बिहारीनगर में डॉ. घनेंद्र वशिष्ठ ने अश्वगंधा के लाभों के बारे में बताया और ग्रामवासियों ने हर घर में अश्वगंधा का पौधा लगाने का संकल्प लिया। आशाओं ने भी पौधे लगाने का दायित्व लिया है।
भोगपुर में गिलोय ग्राम की घोषणा के मौके पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सोरमी सोनकर ने गिलोय के लाभों के बारे में जानकारी दी।
जगजीतपुर में तुलसी ग्राम की घोषणा के अवसर पर डॉ. अश्वनी कौशिक ने तुलसी के फायदे और इसकी व्यावसायिक खेती से होने वाले लाभ पर विस्तार से चर्चा की। इस मौके पर चिकित्सालय के सभी कर्मचारी और ग्रामवासियों ने भाग लिया।