हरिद्वार। श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान तथा प्रेस क्लब, हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मेधावियों छात्रों को सम्मानित किया और उनका हौंसला बढ़ाया। इस दौरान हिन्दी में 10वीं के टॉपर्स को सम्मानित किया गया। समारोह में ‘विचार गोष्ठी’ व ‘कवि गोष्ठी’ का भी आयोजन किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ0 महावीर अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि भानु प्रताप शर्मा व इ. संजय सैैनी रहे। इस कार्यक्रम में डाॅ0 मेनका त्रिपाठी, डाॅ0 प्रेरणा पाण्डेय, डाॅ0 मोना शर्मा व डाॅ0 एन.पी. सिंह ने भी शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रजवल्लित कर किया गया। साथ ही माँ सरस्वती के सम्मुख पुष्पार्पण के बाद बाल कलाकारों ने नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, इस अवसर पर श्वर दे वीणा वादिनी की मधुर धुनों ने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह को सम्बोधित करते हुुए डाॅ0 महावीर अग्रवाल ने कहा कि आजादी के 76 साल बाद भी हिंदी भाषा को अपने ही देश में उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। जबकि विदेशों में इसे सराहा जा रहा है, भारत में हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार करने की दिशा में गंभीर प्रयास की आवश्यकता है। भाषा के प्रति यह विडंबना भारत की सांस्कृतिक पहचान के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करने के लिए नीति निर्धारकों को सक्रिय कदम उठाने चाहिए।
समारोह में अध्यक्ष अरूण पाठक ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा न घोषित करने के पीछे कई राजनैतिक और भौगोलिक कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण आम जनता में हिन्दी के प्रति हीनता का अनुभव है। जबकि देश में हिंदीभाषियों की संख्या सबसे अधिक है। जब लोग हिन्दी के प्रयोग के लिए मानसिकता तैयार कर लेंगे, तब हिन्दी स्वतः राष्ट्रभाषा बन जाएगी।
इस अवसर पर श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान के संस्थापक सचिव डाॅ0 अशोक गिरि ने कहा कि उनका सबसे प्रमुख उद्देश्य हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाना है। इस दिशा में संस्था हमेशा तत्पर रहती है। उन्होंने सभी हिंदी प्रेमियों से अपील की कि वे इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हर संभव प्रयास करें। संस्था का मानना है कि सामूहिक प्रयास ही इस उद्देश्य को सफल बना सकता है।
समारोह में इ. संजय सैैनी, डाॅ0 मेनका त्रिपाठी, डाॅ0 प्रेरणा पाण्डेय, डाॅ0 मोना शर्मा व डाॅ0 एन0पी0 सिंह ने भी हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला।
समारोह में कवि गोष्ठी में डा0 विजय कुमार त्यागी, रेखा सिंघल, वैष्णवी झा, वृंदा शर्मा, अर्चना वालिया, अपराजिता, डा. सुशील कुमार त्यागी, राजकुमारी राजेश्वरी, संजय परगाईं कवियों ने हिन्दी पर आधारित काव्य रचनाओं का पाठ कर तालियाँ बटोरी। साथ ही वैष्णवी झा ने कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन डा0 अशोक गिरि ने स्वयं किया।
इस अवसर सुभाष मलिक, भूदत्त शर्मा, डा. कल्पना कुशवाहा, ब्रिजेंद्र हर्ष, सुमन पंत, नीता नैयर, अनिरुद्ध भाटी, विनीत जौली, बलराम गिरि, कुणाल, प्रमोद गिरि, पंकज गिरि, अभिषेक धीमान, कैलाश भट्ट, अमन दीप, कुलभूषण शर्मा, सुभाष कपिल, बालकृष्ण शास्त्री, दीपा माहेश्वरी, सुनील शर्मा आदि उपस्थित रहे।