प्रेस क्लब की अपेक्षा!_जनता का हितैषी हो हरिद्वार का मेयर

गंगानगरी में नगर निगम चुनावों की गहमागहमी के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। मेयर और पार्षदों के टिकट कब फाइनल होंगे, इस पर हर गली-मोहल्ले में जिक्र हो रहे हैं। आज प्रेस क्लब हरिद्वार में इस विषय पर चर्चा की गई।

हरिद्वार नगर निगम का गठन लगभग 10 साल पहले हुआ था, जो इससे पहले नगरपालिका थी। जनता नगर निगम के मेयर और पार्षदों से सीधे और बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने की उम्मीद करती है, जिनमें साफ-सफाई, बिजली-पानी की व्यवस्था और ट्रैफिक की समस्या होती है। चूंकि हरिद्वार आध्यात्मिक राजधानी है, यहां के मेयर की भूमिका केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की होती है।

पुराने नगर पालिका बायलॉज का महत्व आज भी बरकरार है। 1916 के उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपल एक्ट के तहत बने इस संविधान में हरिद्वार के सुचारू विकास और व्यवस्थाओं के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। इसमें यातायात, वेंडिंग जोन, तांगा-रिक्शा संचालन और मास मदिरा की बिक्री आदि पहलुओं के लिए नियम बने हुए हैं।

हालांकि, इन बायलॉज की पिछले कुछ वर्षों में अनदेखी की गई है। यातायात समस्या, अनियंत्रित ई-रिक्शा और ठेली-रेहड़ी संचालन, वेंडिंग जोन की अनुपलब्धता की समस्याएं गंभीर हैं। इन सबके लिए संविधान में व्यवस्थाएं और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया स्पष्ट हैं, जिससे नगर निगम आमदनी भी बढ़ा सकता है।

हरिद्वार की जनता चाहती है कि नया मेयर और पार्षद इन बायलॉज का गहन अध्ययन करें और उनके अनुसार शहर का संचालन करें। इससे हरिद्वार को व्यवस्थित और सुनियोजित ढंग से विकसित किया जा सकता है, जिससे इसकी राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।

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