उत्तराखंड निकाय चुनाव 2025 के लिए गुरुवार को मतदान जारी रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग मतदान केंद्रों पर पहुंचे। हालांकि, कई वीआईपी, जिनमें उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल हैं, मतदान नहीं कर सके। हरीश रावत का नाम मतदाता सूची से गायब था, जिसके कारण वह अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट नहीं कर पाए। उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने मतदान केंद्र पर सूची में उनका नाम ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वह दर्ज नहीं मिला। इस घटना के बाद हरीश रावत ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे समय-समय पर अपनी मतदाता सूची में नाम की जांच जरूर करें और अपनी जानकारी सुरक्षित रखें। इस पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तंज कसते हुए कहा कि हरीश रावत को यह भी पता नहीं था कि वे कहां के मतदाता हैं और मतदान के दिन ही अपना नाम ढूंढने निकले। हरीश रावत के अलावा, दून अस्पताल के पूर्व एमएस केसी पंत और उनके परिवार के चार सदस्यों के नाम भी सूची में नहीं मिल सके। उन्होंने इसे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का हनन बताया और दो से तीन बूथों पर जाकर भी निराशा हाथ लगी। इस घटना ने मतदाता सूची में खामियों को उजागर किया है और इस पर चुनाव आयोग को ध्यान देने की जरूरत है।