लोकतंत्र के पर्व में गड़बड़ियों ने घटाया मतदान प्रतिशत, बीएलओ की लापरवाही उजागर

राज्य चुनाव आयोग के ऊपर निष्पक्ष चुनाव संचालन कराने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस बार चुनाव प्रक्रिया में सामने आई खामियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन मतदाता सूची को सही तरीके से तैयार नहीं कर पाया, जिससे मतगणना प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान लग गए हैं।

मतदाता सूची में संशोधन न होने के कारण कई मतदाताओं के नाम सूची से गायब रहे। यह गड़बड़ी बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने जनता के साथ डोर-टू-डोर संपर्क नहीं किया। इसका नतीजा यह हुआ कि कई मतदाता अपने नाम मतदाता सूची में न पाकर मतदान करने से वंचित रह गए।

इस लापरवाही का असर कई मतदान केंद्रों पर देखने को मिला। मतदाता अपने अधिकार का उपयोग न कर पाने के कारण नाराज दिखे। कई जगहों पर नारेबाजी और झड़पें हुईं, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई और मतदान प्रतिशत पर भी इसका सीधा असर पड़ा।

यदि प्रशासन मतदाता सूची जैसी बुनियादी चीज को सही तरीके से प्रबंधित नहीं कर पाया, तो मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी भरोसा करना मुश्किल हो सकता है। यदि आयोग अपनी भूमिका में असफल रहता है, तो इसे जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

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