हरिद्वार। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की मांग लगातार बढ़ रही है। यह विचार हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने बालाजी इंस्टीट्यूट एंड ईएच रिसर्च सेंटर, अलीपुर बहादराबाद में आयोजित ईएमए (इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक मेडिसिन एसोसिएशन) के 37वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर व्यक्त किए।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि मदन कौशिक और विशिष्ट अतिथि कैंसर स्पेशलिस्ट एवं बायोम फार्मा भिलाई छत्तीसगढ़ के निदेशक डॉ. निलेश थावडे, ईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. पी. एस. चौहान, एडीजीसी कुशल पाल सिंह चौहान, बालाजी इंस्टीट्यूट की प्राचार्या डॉ. वी. एल. अलखानिया, ईएमए उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मुकेश चौहान, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. एन. एस. टाकुली, क्षत्रिय महासभा के प्रदेश महामंत्री हरिसिंह शेखावत तथा कैंप कार्यालय अधीक्षक डॉ. ऋचा आर्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। साथ ही मदन कौशिक ने बालाजी इंस्टीट्यूट एवं ईएच रिसर्च सेंटर कैंपस में ईएमए कार्यालय का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर डॉ. निलेश थावडे ने कहा कि इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एकमात्र ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो मानव शरीर को दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचाने में सक्षम है। यह चिकित्सा पद्धति कई असाध्य और जटिल रोगों का इलाज करने में कारगर साबित हो रही है।
ईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. चैहान ने कहा कि इलेक्ट्रोहोम्योपैथी वहां से शुरू होती है, जहां अन्य चिकित्सा पद्धतियां असफल हो जाती हैं। यह साध्य और असाध्य दोनों प्रकार के रोगों को ठीक करने की अद्भुत क्षमता रखती है।
ईएमए के लीगल एडवाइजर कुशल पाल सिंह चैहान ने बताया कि संगठन ने 37 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और अब 38वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस मौके पर दिल्ली से आए डॉ. डी. एस. नेगी, डॉ. आर. के. माहेश्वरी, रुड़की के डॉ. आदित्य पंवार, देहरादून की डॉ. मंजूला होलकर, हरिद्वार की डॉ. लक्ष्मी कुशवाहा और ऋषिकेश की डॉ. हीना कुशवाहा को ईएमए की आजीवन सदस्यता प्रमाण पत्र मुख्य अतिथि मदन कौशिक द्वारा प्रदान किए गए।