जाति और स्थाई प्रमाण पत्रों के लिए अब नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर

आर पी उदास
देहरादून। उत्तराखंड वासियों को अब जाति स्थाई निवास और हैसियत प्रमाण पत्रों के लिए बेवजह चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे इसके लिए शासन ने सेवा अधिकार अधिनियम में संशोधन कर समय सीमा और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड शासन के कार्मिक और सतर्कता अनुभाग ने उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम में संशोधन कर दिया है इसके तहत स्थाई निवास जाति प्रमाण पत्र और खतौनी आदि के लिए समय सीमा तय कर दी है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद तहसीलदार को 15 दिन के भीतर जाति प्रमाण पत्र बना कर देना होगा इसी प्रकार स्थाई निवास प्रमाण पत्र और हैसियत प्रमाण पत्र भी 15 दिन के भीतर बनाकर देने होंगे। यह दोनों प्रमाण पत्र उप जिला अधिकारी के द्वारा जारी किए जाते हैं। इसी तरह चरित्र प्रमाण पत्र 10 दिन में ,आय प्रमाण पत्र 15 दिन में ,उत्तरजीवी पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र 15 दिन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र 10 दिन में ,दैवी आपदा आर्थिक सहायता प्रमाण पत्र 2 दिन में बना कर देना होगा। खतौनी की कॉपी आवेदन के दिन ही देनी होगी ।मुख्यमंत्री राहत कोष से प्राप्त धनराशि का वितरण 5 दिन के भीतर करना होगा। इस संशोधन में अधिकारियों के साथ ही प्रथम रिपोर्ट लगाने वाले लेखपालों के लिए भी समय सीमा तय कर दी गई है अक्सर देखने में आता था कि लेखपाल इन प्रमाणपत्रों के लिए लोगों को कई कई दिनों तक चक्कर कटवाते थे ,अब अधिनियम में सशोधन के बाद अगर कोई अधिकारी तय समय सीमा पर प्रमाण पत्र बनाकर नहीं देता है तो उसकी शिकायत होने पर शासन की ओर से संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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