छोटे कॉलोनीनाइजरो पर सितम बड़े कॉलोनीनाइजरों पर रहम भूमाफियाओं पर नकेल कसने में प्रशासन नाकाम

जिला विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हरीश चंद्र कांडपाल ने कहा है कि नीलकंठ के खिलाफ शीघ्र ही ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जायेंगी।

प्रमोद कुमार

रूद्रपुर। सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाकर अपनी तिजोरियां भरने वाले अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ प्रशासन बड़ी कार्रवाई करने से कतरा रहा है, कार्रवाई के नाम पर छोटे कालोनाइजरों पर सख्ती की जा रही है जबकि बड़े भू माफिया अपनी पहुंच और पैसे के दम पर कार्रवाई से बचते आ रहे हैं, जिला विकास प्राधिकरण पिछले दिनों अवैध कालोनियों का चिन्हीकरण करने के बाद नोटिस भी देकर ध्वस्तीकरण की चेतावनी भी दे चुका है लेकिन अभी तक कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति नजर आ रही है।

बता दें जिला विकास प्राधिकरण लगातार अवैध कालोनीयों के खिलाफ नोटिस की कार्रवाई कर रहा है, वर्तमान में सैकड़ों कॉलोनियां प्राधिकरण की रडार पर हैं, दरअसल प्राधिकरण के सख्त नियमों के बावजूद जिले भर में बड़ी संख्या में कॉलोनियां नियमविरुद्ध काटी जा रही है, विभाग के नियमों को ताक पर रखकर ग्राहकों की आंखों में धूल झोंकी जा रही हैं, ऐसी दर्जनों कॉलोनियों को चिन्हित कर कागज़ी कार्रवाई शुरू की गई है, ऐसे ही अवैध कालोनाइजरों में नीलकंठ कालोनी के स्वामी जोधा सिंह रावत का नाम भी शामिल हैं, जोधा सिंह रावत की नीलकंठ फेस-1, फेस-2, फेस-3 और फेस-4 कालोनियां जांच में अवैध पायी गयी थी जिसके खिलाफ प्राधिकरण ने एक्शन तो लिया मगर बाद में लीपापोती शुरू हो गयी।

अवैध नीलकंठ कालोनी के स्वामी जोधा सिंह रावत को नोटिस भेजकर ध्वस्तीकरण की चेतावनी भी दी गयी लेकिन सैटिंग गैटिंग के दम पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, जिससे अवैध कालोनाइजरों के हौंसले बुलंद हैं, अवैध कालोनाइजरों के बुलंद हौंसलों के चलते ही आज रूद्रपुर शहर और इसके आस पास के इलाकों में अवैध अवैध कॉलोनियों का जाल फैलता जा रहा है, लगातार नगर निगम व जिला प्रशासन इन कालोनियों पर कार्रवाई कर पीला पंजा भी चलवा रहा है, इसके बावजूद अवैध कॉलोनियों की शहर में भरमार है, सरकार भी काफी सख्ती कर चुकी है लेकिन ये सख्ती भी भू माफियाओं पर लगाम नहीं लगा पा रही जान कर हैरानी होगी कि पिछले दस साल में रूद्रपुर शहर के आस पास 153 अवैध कॉलोनी कट चुकी हैं, जिला प्रशासन, नगर निगम भी समय-समय अवैध निर्माण तोड़ते हैं बावजूद इसके अवैध कॉलोनियां लगातार विस्तार ले रही हैं।

अवैध रूप से कट रही कालोनियों का ही नतीजा है कि 2011 की जनगणना के अनुसार उधम सिंह नगर की आबादी 16 लाख 48902 थी,जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 1062142 एवं शहरी में 586760 आबादी थी जो अब बढ़कर करीब दुगनी के पहुंच चुकी है, शासन की सख्ती के बावजूद अवैध कॉलोनियों को बनाने के साथ मकान बनाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है, कृषि भूमि पर बिना डॉयवर्सन के आवासीय प्लाट काटे जा रहे हैं,वर्तमान में नीलकंठ जैसी कई अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं बावजूद जिम्मेदार मौन हैं,अवैध कालोनाइजरों की पैंठ इतनी मजबूत है कि कृषि भूमि में अवैध कॉलोनी बनाकर प्लॉट काट रहे हैं और तहसील में अंदरखाते अवैध रजिस्ट्रियां भी हो जाती हैं, जो पहुंच वाले कॉलोनाइजर हैं उन पर कभी मामले दर्ज नहीं हुए हैं और न ही भ्रष्टाचार के जिम्मेदार अफसरों पर ठोस कार्रवाई होती है, नियमानुसार कालोनाइजर के पास कॉलोनाइजर लाइसेंस, होना चाहिए भूमि का आवासीय प्रयोजन हेतु डायवर्सन होना चाहिए।

विकसित की जा रही कॉलोनी में कॉलोनीनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, कालोनी काटने की अनुमति, रेरा के नियमों का अनुपालन सहित कई जरूरी नियमों को पूरा करना होता है, ऐसा नही होने पर भू-खण्ड व मकान बेचना अवैध है, लाइसेंस लेकर ही कॉलोनी काटी जा सकती है, इसमें सड़क, पार्क, फुटपाथ, कामर्शियल साइट, पेयजल व सीवर सुविधा देनी होती है, अवैध कालोनियों में इन मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है, कई जगह तो खेतों में कालोनियां कांटी जा चुकी है, जोधा सिंह रावत की नीलकंठ कालोनी इसका जीता जागता उदाहरण है, जहां कालोनाइजर ने फसलें उगाने वाले खेतों पर कालोनी खड़ी कर दी है, ऐसी कालोनियों में मानकों के अनुसार न तो सड़कें हैं न पानी जो आने वाले समय में लोगों के लिए मुसीबत बन जायेंगी।।

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