हरिद्वार। आर. डी. काव्यकुल संस्था, दिल्ली तथा जिया साहित्य कुटुम्ब, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में “हरिद्वार काव्य महोत्सव – द्वितीय” का आयोजन शिवानंद आश्रम, भूपतवाला में भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस साहित्यिक महोत्सव की अध्यक्षता गुरु कांगड़ी विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निशा शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य श्री प्रकाशन के प्रकाशक श्री राम श्याम उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी नरेशानंद महाराज एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात कु. अपराजिता द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉ. रंजीत शर्मा थे तथा संचालन प्रमोद शर्मा और इंजीनियर नितिन दीक्षित द्वारा किया गया। संस्था की ओर से सभी आमंत्रित कवियों को माल्यार्पण, स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान, हरिद्वार के संस्थापक डॉ. अशोक गिरि ने डॉ. रंजीत शर्मा को हिन्दी सेवा हेतु विशेष सम्मान प्रदान किया। काव्य पाठ सत्र में देशभर से आए रचनाकारों—डॉ. मीरा भारद्वाज, अभय सिंह, राकेश कुमावत, दीन दयाल दीक्षित, प्रियांक बेनीवाल, जिया हिन्दवाल, डॉ. रानी कंचन लता, डॉ. विजय त्यागी, अपराजिता, कृष्ण मुरारी लाल, नीरज चौधरी, गुलजार सिंह, प्रेम दक्ष और विपुल माहेश्वरी ने भाग लिया और अपनी सशक्त रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में कई प्रभावशाली पंक्तियाँ भी सुनने को मिलीं, जिनमें डॉ. अशोक गिरि की पंक्तियाँ “कितना बदलते हैं लोग, कितना भूलते हैं लोग। जिन्हें हम समझें थे हीरा, कोयला निकले वे लोग।।”, डॉ. रंजीत शर्मा की पंक्तियाँ “टूटी-फूटी अंग्रेजी की, औकात बताने आया हूँ। जो अपने घर में ठुकराई जाती, उसे बचाने आया हूँ।।”, तथा अपराजिता की पंक्तियाँ “राम के नाम का तुम जाप करना सीख लो। द्वेष, दंभ, त्याग, मन निष्पाप करना सीख लो।।” विशेष सराही गईं। यह महोत्सव हिन्दी साहित्य और संस्कृति के प्रति समर्पण का सजीव उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।