देहरादून
देहरादून के देहराखास क्षेत्र में मंगलवार शाम आयोजित जनसभा में सैकड़ों मजदूरों ने एकत्र होकर अपनी बस्तियों को तोड़े जाने के खिलाफ आवाज बुलंद की। मजदूरों का आरोप है कि प्रशासन एलिवेटेड रोड परियोजना के नाम पर बस्तियों को उजाड़ने की तैयारी कर रहा है, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी विभागों के बड़े अतिक्रमणों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
सभा में वक्ताओं ने मुख्यमंत्री के 17 जनवरी को दिए गए आश्वासन की याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि एक भी मजदूर बस्ती नहीं तोड़ी जाएगी। मजदूरों ने कहा कि पिछले आठ वर्षों से मालिकाना हक और पुनर्वास की बात की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मजदूरों ने यह भी बताया कि बिंदाल नदी के किनारे बसे लोगों को बिना किसी नीति के बेदखल किया जा रहा है, ताकि दिखाया जा सके कि अतिक्रमण पर कार्रवाई हो रही है। उन्होंने 2024 की घटना का हवाला देते हुए कहा कि उस समय प्रशासन ने रिस्पना नदी किनारे 525 घरों को अवैध बताया था, लेकिन बाद में स्वीकार किया गया कि उनमें से 400 से अधिक घर वैध थे।
सभा में मजदूरों ने कल्याणकारी योजनाओं में हो रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की भी आलोचना की। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों से निर्माण मजदूर योजना में पंजीकरण नहीं हो रहा है।
जन हस्तक्षेप के बैनर तले आयोजित इस सभा में चेतना आंदोलन से जुड़े राजेंद्र शाह, शंकर गोपाल, राजेश यादव, इरफान, राम सेवक और दया जी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सभा के अंत में लोगों ने संकल्प लिया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।