(आर. पी.उदास)
एक और जहां पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश ने भारी तबाही मचा रखी है वहीं मैदानी क्षेत्रों में इस बार लोग बारिश के लिए तरस गए हैं ।खासकर बारिश ना होने की वजह से धान की बुवाई नहीं हो पा रही है, और निराश किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।
अमूमन देखा गया है कि 15_ 20 जून के बाद मानसून सक्रिय हो जाता है ,परंतु इस बार जुलाई का भी आधा महीना भी चुका है लेकिन बारिश नाम मात्र को कहीं-कहीं पर ही हुई है । हालांकि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर बारिश ने भारी तबाही मचाई है ,परंतु मैदानी क्षेत्र खासकर उधम सिंह नगर ,हरिद्वार और देहरादून जिलों में इस बार बारिश नहीं हुई है ।एक दो बार कुछ स्थानों पर अभी तक हल्की बारिश हुई है तो वह किसानों की फसलों के लिए पर्याप्त नहीं है बारिश ना होने के कारण खरीफ की फसल खासकर धान की बुवाई प्रभावित हुई है ।दिनभर तेज धूप और भीषण गर्मी के कारण गन्ने की फसलें सूख रही हैं , कई स्थानों पर जहां पानी के पर्याप्त संसाधन नहीं है अभी तक धान की बुवाई शुरू तक नहीं हुई है बारिश ना होने से जहां आम जनता गर्मी से परेशान है वहीं परेशान और हताश किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर ताकने को विवश है।