संसार से जाने के बाद आंखों का अमूल्य उपहार दे गईं राजरानी गुड़िया

काशीपुर। मृत्यु सत्य है, किंतु उस सत्य को भी लोक-कल्याण के मार्ग पर मोड़ देना ही महानता है। प्रकाश रेजीडेंसी निवासी ब्रह्मलीन श्रीमती राजरानी गुड़िया ने संसार से विदा लेकर भी अपनी आंखों के रूप में मानवता को एक अमूल्य उपहार सौंपा है। उनके परिजनों द्वारा लिया गया नेत्रदान का यह निर्णय समाज के लिए एक ‘नजीर’ बन गया है।

पुण्य प्रसून : दो जीवन पाएंगे दृष्टि का सौभाग्य गुड़िया परिवार की सुपुत्री श्रीमती अंशुका पचौरी एवं दामाद विवेक पचौरी ने दुःख की घड़ी में भी धैर्य और सेवा का परिचय देते हुए नेत्रदान की सहमति दी। श्रीमती राजरानी गुड़िया जी की पुतलियां अब दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के अंधकारमय जीवन में ‘नव-प्रकाश’ का संचार करेंगी। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ काशीपुर के तत्वावधान में संपन्न यह 35वां नेत्रदान गुड़िया परिवार के सेवाभावी व्यक्तित्व का परिचायक है। संस्था के संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा “हमारी सनातन संस्कृति महर्षि दधीचि और राजा शिवि के त्याग से सिंचित है। नेत्रदान देह का भंग नहीं, बल्कि देह का सार्थक अंत है। केवल कॉर्निया का दान देकर हम किसी का संसार बदल सकते हैं।”

इस महान संकल्प को पूर्ण करने में वरिष्ठ समाजसेवी विमल गुड़िया एवं विकल्प गुड़िया का विशेष और सक्रिय सहयोग रहा। संस्था के सचिव प्रियांशु बंसल ने गुड़िया परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की और समस्त काशीपुर क्षेत्रवासियों से इस पुनीत अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया। 

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