सरकार एक ओर जहां नई शिक्षा नीति लागू कर इसके फायदे बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है वहीं राज्य के प्राइवेट स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के नाम पर बच्चों और उनके अभिभावकों से जमकर लूट खसोट की जा रही है । सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं।
राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर काफी निम्न होने के कारण ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखकर उन्हें प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं । हालांकि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता परक शिक्षा देने के लिए समय समय पर प्रयास करती रहती है , अभी हाल ही में उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति लागू की गई है सरकार दावा कर रही है कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षा के स्तर में सुधार आएगा । सरकार का यह दावा कहां तक सही साबित होता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा ।परंतु सरकार की घोर उपेक्षा के कारण प्राइवेट स्कूलों में विभिन्न तरीके अपनाकर अभिभावकों से लूट खसोट किए जाने की लगातार सूचनाएं सामने आती हैं । कोरोना काल में इन स्कूलों पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों के बाद अभिभावकों को कुछ हद तक राहत थी परंतु अब सरकार द्वारा सभी प्रतिबंध हटा दिए जाने के बाद प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी पर उतर आए हैं । बच्चों से मोटी फीस वसूलने के साथ ही कुछ स्कूल एडमिशन फीस के नाम पर तो कुछ वार्षिक शुल्क के नाम पर मोटी रकम जमा करवा रहे हैं, कोई अभिभावक विरोध करता है तो बच्चों का भविष्य खराब किए जाने की धमकियां दी जाती हैं। इसके अलावा ज्यादातर प्राइवेट स्कूल कापी किताबों, ड्रेस और बैग आदि खुद से खरीदने को मजबूर कर रहे हैं कुछ स्कूल अपने पास से कॉपी किताबें और ड्रेस भिड़ा रहे हैं तो कुछ स्कूलों ने दुकानें निर्धारित कर दी हैं , इन दुकानों पर स्कूलों द्वारा तय किए गए दाम पर कोर्स और ड्रेस बेचे जाते हैं दुकानों से इनका मोटा कमीशन बंधा है । प्राइवेट स्कूल स्कूलों द्वारा अभिभावकों से की जा रही इस लूट से शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अच्छी तरह वाकिफ हैं परंतु किसी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है। बच्चों से हर साल एडमिशन फीस लिए जाने के सवाल पर उधम सिंह नगर के जिला शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य इतना ही कहते हैं कि इस मामले में जांच कराई जाएगी।