पेयजल निगम के अधिकारियांे और कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

हरिद्वार । पेयजल निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभाग को राजकीय घोषित करने, राजकीय विभाग घोषत होने तक वेतन पेंशन का आहरण कोषागार से करने, सेंटेज व्यवस्था को समाप्त कर कार्मिकों के वेतन पंेशन भुगतान के लिए पेयजल सचिव के अधीन बजट का प्रावधन करने की मांग को लेकर पेयजल निगम की निर्माण शाखा में धरना प्रदर्शन किया। धरना प्रदर्शन के दौरान के दौरान उत्तराखंड पेयजल निगम कर्मचारी महासंघ के मंडल सचिव कुमार गौरव ने बताया कि विभाग में संेटेज व्यवस्था लागू है। जिसके तहत परियोजना पूरी होने पर विभाग को 12.5 प्रतिशत सेंटेंज मिलता है। जिससे कार्मिकों के वेतन, पेंशन व अन्य भत्तों का भुगतान किया जाता है। पेयजल योजनाओं से जुड़ा काम अन्य एजेंसियों को दिया जा रहा है। जिससे विभाग को कम योजनाएं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि सेंटेंज कम होने के कारण कार्मिकों को तीन महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। जिससे ईएमआई, घर का राशन, बच्चों की स्कूल फीस व अन्य खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि सेंटेंज व्यवस्था को समाप्त कर विभाग को राजकीय घोषित किया जाए। राजकीय विभाग घोषित होने तक वेतन पेंशन का भुगतान कोषागार से किया जाए और प्रत्येक माह की 1 तारीख को सभी कार्मिकों को वेतन व पेंशन दी जाए। प्रांतीय आॅडिटर शलभ मित्तल ने बताया कि मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में किए जा रहे आंदोलन के क्रम में जनपदवार 21 फरवरी से 5 मार्च तक प्रदेश मुख्यालय देहरादून में प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विभाग के राजकीयकरण की मांग की जा रही है। इसके लिए कई बार समितियों का गठन भी किया गया। लेकिन आज तक इसे मूर्त रूप नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मांगे पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन में इंजीनियर सीपी गंगवार, अरूण कुशवाहा, मौ.परवेज, शशि भूषण शाह, एकता रानी, गीता मवानी, सिद्धार्थ कुमार, शिव शर्मा, जीपी गैरोला, अनिकेत गुप्ता, प्रियव्रत गुप्ता, मनीष कश्यप, विकास सैनी, इंजीनियर सचिन कुमार, अंबिका प्रसाद भट्ट, नीरज कपिल, वर्षा बिष्ट, वैजयन्ती आर्या, सावित्री, अरूण कुशवाहा, सुप्रिया कुलश्रेष्ठ सहित बड़ी संख्या में अधिकारी कर्मचारी शामिल रहे।

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