अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का ठिकाना बना उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखण्ड अवैध रूप से भारत मंे आकर रह रहे विदेशियों का ठिकाना बनता जा रहा है। ऑपरेशन कालनेमि और ऑपरेशन क्रैकडाउन जैसे अभियानों के तहत पुलिस ने हजारों संदिग्धों का सत्यापन किया है। इसके साथ ही अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है। 10 जुलाई 2025 से लेकर मार्च 2026 तक चले इस अभियान में सैकड़ों लोगों पर कार्रवाई हुई है, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

पुलिस से मिले आंकड़े बताते हैं कि 10 जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक उत्तराखंड पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान के दौरान कुल 511 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया था। इनमें कम से कम 19 बांग्लादेशी नागरिकों की पुष्टि हुइ। जो बिना वैध दस्तावेजों के राज्य में रह रहे थे। पुलिस ने इनमें से कई को विदेशी अधिनियम के तहत हिरासत में लिया और बाद में वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर कुछ को डिपोर्ट भी किया गया। अन्य के खिलाफ न्यायालय में मुकदमे लंबित हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह आंकड़ा केवल चिन्हित मामलों का है, जबकि सत्यापन के दौरान हजारों लोगों की जांच की गई। प्रदेश की राजधानी देहरादून इस पूरे अभियान का केंद्र बिंदु बनकर उभरा है। यहां सबसे अधिक विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी दर्ज की गई। 29 मार्च 2026 को भी देहरादून के रायपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत तीन विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया। इनमें दो उज्बेकिस्तान और एक किर्गिस्तान की नागरिक थी। जांच में सामने आया कि ये महिलाएं फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और स्थानीय पहचान पत्रों के सहारे लंबे समय से यहां रह रही थीं। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ विदेशी अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। उनसे पूछताछ के दौरान दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसी तरह साल 2025 के दौरान देहरादून के पटेल नगर नेहरू कॉलोनी रायपुर और सहसपुर क्षेत्रों में चलाए गए सत्यापन अभियान में कई बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एक वर्ष के भीतर कम से कम 19 बांग्लादेशी घुसपैठियों को अलग अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। इनमें महिलाओं और पुरुषों दोनों की संख्या शामिल थी। कई मामलों में आरोपियों के पास से फर्जी भारतीय पहचान पत्र बरामद हुए.। पुलिस ने इन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा, जबकि कुछ मामलों में दूतावास से संपर्क कर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी पूरी की गई।

 

 

 

 

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