धर्म शास्त्रों का संदेश सर्वमान्य और सर्वाेपरि होता है : स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती

हरिद्वार। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परम अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने कहा है कि धर्म शास्त्रों का संदेश सर्वमान्य और सर्वाेपरि होता है तथा भारत के संविधान की रचना भी शास्त्रों के अनुरूप हुई है । धर्म से ही कर्मों का निर्धारण होता है और संपूर्ण विश्व में कर्म को ही प्रधान माना जाता है । वे आज विष्णु गार्डन स्थित श्रीगीता विज्ञान आश्रम में गीता प्रचार सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पधारे भक्तों को गीता के उपदेशों से अभिभूत कर रहे थे।

गीता मनीषी शतायु संत स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने धर्म शास्त्रों का सार समझाते हुए कहा कि अभिमान व्यक्ति के पतन का कारण बनता है और अभिमान ही व्यक्ति को युद्ध के लिए अभिप्रेरित करता है जिससे वह विकास से हटकर विनाश के गर्त में समा जाता है। भारत को विश्व का सर्वाधिक शांतिप्रिय देश बताते हुए उन्होंने कहा कि सर्वे भवंतु सुखिनः की सामना करने वाला भारत कभी युद्ध का पक्षधर नहीं रहा क्योंकि भारत शास्त्र सम्मत ही विचारधारा का अनुयायी है और उसने रामायण तथा महाभारत काल के युद्ध से बहुत कुछ सीखा है। युद्ध को विकास का दुश्मन और अभावों का जनक बताते हुए स्वामी विज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज ने कहा कि वर्तमान युद्ध से विश्व का कोई देश अछूता नहीं रहा है और भारत में उसी चीज का अभाव है जो हमारे देश में पैदा नहीं होती जबकि वैश्विक स्तर पर भारतीय नागरिक सुख और शांति का अनुभव करते हैं यह नारायण की कृपा है । उन्होंने सभी भक्तों से संकट के समय में धैर्य धारण करने का आवाहन करते हुए कहा कि धर्म और सत्ता का उद्देश्य ही सभी का कल्याण करना है तथा धर्म एवं शास्त्रों के सापेक्ष आचरण करने वाले को कभी दुखों का सामना नहीं करना पड़ता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *