बदरीनाथ धाम।
बदरीनाथ धाम में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ज्योतिष पीठ के दंडी स्वामी प्रत्यक्य चैतन्य मुकुंदानंद गिरी ने शंकराचार्य परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के आदि पुरुष शंकराचार्य ने विभाजित समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। साथ ही उन्होंने संस्कृत भाषा की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि मातृभाषा संस्कृत मृतप्राय होती जा रही है, इसके संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा।
सारस्वत अतिथि चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने बदरीनाथ माहात्म्य पर प्रकाश डालते हुए शोधात्मक तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि बदरीपुरी पंच तत्वों के विशेष संयोग से जुड़ी है, जहां पंच शिला, पंच धाराएं, पंच कुंड और पंच बदरी विद्यमान हैं। बदरी विशाल स्वयं बदरीश पंचायत में विराजमान रहते हैं।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप सेमवाल ने किया, जबकि डॉ. मनोज विश्नोई ने सम्मेलन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में देश के 22 राज्यों से 458 विद्वानों एवं प्राध्यापकों ने प्रतिभाग किया, वहीं 200 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर शिवानंद उनियाल, डॉ. जनार्दन नोटियाल, डॉ. कृष्णानंद पंत, कुशाग्र, शैलेश ध्यानी, संजय भट्ट सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।