मानसून से पहले आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर, सभी जिलों से 72 घंटे में मांगी समीक्षा रिपोर्ट

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल विभिन्न विभागों की समन्वय क्षमता, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक तैयारियों का आकलन करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण और तकनीक आधारित प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने बताया कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है, ताकि संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया गया है और अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण और जन-जागरूकता अभियानों को भी आपदा जोखिम कम करने के लिए आवश्यक बताया।

धामी ने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। साथ ही आम नागरिकों को आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन संपर्क नंबरों और प्राथमिक सावधानियों की जानकारी देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन योजना (एसडीएमपी) तथा राज्य के सभी 13 जिलों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं (डीडीएमपी) का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए सभी विभागों की भूमिका और समन्वय को स्पष्ट करती हैं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का मार्गदर्शन करेंगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में डीप डाइविंग सेट, थर्मल इमेजिंग कैमरा, नाइट विजन कैमरा, अंडरवाटर ड्रोन, सोनार सिस्टम, हाइड्रोलिक कटर और सीबीआरएनई आपदाओं में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे।

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