हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था बाबा हरिहर धाम का वार्षिकोत्सव महामंडलेश्वर महंतों-संतों के सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। वार्षिकोत्सव कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हरिहर पीठाधीश्वर सुयज्ञ मुनि महाराज ने कहा कि बाबा हरिहर धाम धार्मिक प्रकल्पों को चलाकर समाज में अपनी अमिट छाप छोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा हरिहर धाम शिक्षा चिकित्सा सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध होकर सनातन संस्कृति को बढ़ाने का कार्य करते हुए धर्म के प्रति श्रद्धालु भक्तों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संतों का जन्म सनातन धर्म के संरक्षण संवर्धन होता है, मठ मंदिर आश्रम सनातन धर्म को बढ़ाने के लिए संत अपना समूचा जीवन लगा देते हैं। महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि बाबा हरिहर धाम समाजहित में बढ़-चढ़कर कार्य करते हुए लोगों को सनातन धर्म के प्रति जागरूक करके लोगों को धर्म के प्रति आकर्षित कर रहा है। बाबा हरिहर धाम सनातन धर्म को संरक्षित करने के लिए वर्ष भर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास महाराज ने कहा कि धार्मिक संस्थाएं और संतों का जीवन समाज को समर्पित रहता है, हमें जीवन में सत्य के मार्ग पर चलते हुए गौ, गंगा, गीता, माता-पिता एवं गुरुजनों की सेवा करनी चाहिए।
बाबा हरिहर धाम वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के संयोजक महंत कमल दास महाराज ने कहा कि बाबा हरिहर धाम उदासीन परंपरा के अंतर्गत देश और समाज को सनातन धर्म की ओर अग्रसर कर रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा हरिहर धाम साधु संत एवं महात्माओं के सानिध्य में देश और समाज में धर्म की स्थापना कर रहा है और आने वाली युवा पीढ़ी को धर्म के प्रति जागरूक करने में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाएं, आश्रम, मठ-मंदिर सनातन परंपराओं को संरक्षित करके संवर्धन करने में लगी रहती है। बाबा हरिहर धाम वार्षिकोत्सव समारोह की अध्यक्षता हरिहर पीठाधीश्वर सुयज्ञमुनि मुनि महाराज ने की और संचालन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने किया। वार्षिकोत्सव समारोह के संयोजक महंत कमलदास महाराज ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद, जगदीश दास, दुर्गादास महाराज, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि, म.मं. भगवत स्वरूप, महंत विष्णुदास, महंत दुर्गादास, महंत प्रेम दास, भक्त दुर्गा दास, गोविंददास, शांतिदास, सेवादास, विवेकमुनि, दामोदर शरण दास, अरुण दास, रामनोमी, प्रहलाद दास, विष्णु दास, किशनदास महाराज उपस्थित रहे।