हरिद्वार। पुलिस ने बैंक से इन्श्योरेंस के नाम पर फर्जी लोन लेने वाले शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुये छः आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बैंक को चौपहिया वाहनों के लोन के नाम अठ्त्तर लाख रूपये का चूना लगा चुके हैं। गिरोह के छः आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें छः फरार हैं। जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
आज दोपहर प्रेसवार्ता के दौरान एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह ने ठगी का खुलासा करते हुये बताया कि विगत 27 जून को ज्वालापुर कटहरा बाजार स्थित अल्मोड़ा अर्बन को-आपरेटिव बैंक के प्रबन्धक हरिदत्त भट्ट ने तहरीर देकर बताया कि उनकी शाखा से 8 अभियुक्तों ने चौपहिया वाहनों के नाम पर 70 लाख रुपये का लोन लेकर ठग लिये है तथा जो आर.सी. व दस्तावेज बैंक में जमा किये गये थे, वह सब फर्जी हैं। धोखाधड़ी व ठगी के आरोप में साकार गर्ग व अन्य के विरूद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 473, 120बी में मुकदमा दर्ज कर जाँच ज्वालापुर कोतवाली उपनिरीक्षक नरेश गंगवार को दी गई।
आरोपियों की खोजबीन के लिये ज्वालापुर प्रभारी निरीक्षक कुन्दन सिंह राणा के नेतृत्व में टीम गठित की गयी। टीम की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 अभियुक्तों को दबोचा गया।
पुलिस टीम द्वारा पकड़े गये आरोपियों में साकार गर्ग के बैंक से अच्छे सम्पर्क होने पर फर्जी लोन पास कराता था। आकाश कुमार व जाग्रत गर्ग द्वारा कम्प्यूटर के माध्यम से फर्जी आर.सी. कोटेशन आदि तैयार की जाती थी। गुलाब सिंह द्वारा मारूति ब्रैजा UK08BC-1285 पर 9 लाख, दिलनवाज द्वारा टाटा हैरिययर UK08BC-0280 पर 11 लाख तथा कुनाल कोरी मारूति ब्रैजा UK08BB-7198 पर 8.10 लाख का लोन लिया गया था तथा फरार आरोपियों में राव अजीम, किरन पत्नी मेघराज, शशांक राजोरा, आरती पत्नी राजू यादव, मानसी अग्रवाल पुत्री नवनीत अग्रवाल, अंकुल देवी पत्नी कृष्णपाल हैं।
आरोपियों के अपराध करने का तरीका
गिरोह के सदस्यों ने रानीपुर मोड़ पर कुमार फाईनेंस कम्पनी नाम से एक शाखा खोली। जिसका फर्जी खाता शाकुम्बरी आटोमोबाइल व मिडास आटोमोबाईल फर्म के नाम से HDFC, PNB, YES BANK, PUNJAB SIND BANK में खुलावाया। आरोपियों ने फाईनेंस कम्पनी की आड़ में अन्य लोगों के साथ मिलकर बैंक में वाहन लोन के लिये एप्लाई किया था।
आरोपित साकार गर्ग की पहचान अल्मोड़ा को-ओपरेटिव बैंक में बैंककर्मी के होने से मिलकर फर्जी कोटेशन के आधार पर वाहन लोन बिना वेरिफिकेशन के करवाते थे तथा पैसा अपने-अपने फर्जी खातों में डलवाकर आपस में बांट लेते थे। ठगी के लिए फाईनेंस कम्पनी के ऑफिस में फर्जी आर.सी., इन्श्योरेंस तैयार कर एवं कार की फोटो बनाकर बैंक में जमा करते थे। किसी व्यक्ति को धोखाधड़ी का शक न हो, इसलिये लोन की कुछ किस्ते बैंक में जमा करते थे।
बैंक में जमा कराई गई आर.सी. दो पहिया वाहनों के नाम पर दर्ज हैं। आरोपियों द्वारा सड़कों पर चलते वाहन से नम्बर देखकर उसी नम्बर की फर्जी आर.सी. तैयार कर दी जाती थी। आरोपियों की ओर से अन्य बैकों में भी वाहन लोन के लिए फर्जी फाईले दी गयी हैं। जिसके सम्बन्ध में पुुलिस की ओर से जांँच पड़ताल की जा रही है । गिरोह के सदस्य अल्मोड़ा अर्बन को-आपरेटिव बैक को अब तक करीब 7800000 (अठ्त्तर लाख रूपये) की चपत लगा चुके है। धोखाधड़ी के घटना में अन्य बैंको से जाँच-पड़ताल कर छानबीन की जा रही है।
जाँच पड़ताल करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक कुन्दन सिंह राणा, वरिष्ठ उननिरीक्षक सन्तोष सेमवाल, उननिरीक्षक नरेश गंगवार, शमशेर अली, महिपाल सैनी, प्रदीप कुमार व पुष्कर सिंह चौहान हेड कांस्टेबल धर्मवीर सिंह, कांस्टेबल संदीप, सुनील, बृजमोहन, भाग सिंह, ताजवर सिंह, अनिल बिष्ट, विरेन्द्र कुटियाल, सुखदेव सिंह शामिल रहे।