काशीपुर। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध चैती मेला में मां बाल सुंदरी देवी का डोला वापस जाने के बाद, एक महीने तक चलने वाले चैती मेले की रौनक अब फीकी पड़ने लगी है। इसका मुख्य कारण मेले में बेहताशा महंगाई और गेहूं की कटाई है ।

उल्लेखनीय है कि काशीपुर में लगने वाला उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध चैती मेला चैत्र नवरात्र की शुरुआत यानी 30 मार्च को शुरू हुआ था जो कि लगभग एक महीने तक चलेगा। सप्तमी की मध्य रात्रि में मां बाल सुंदरी देवी का डोल मेले में पहुंचने के बाद मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई थी इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मेले में पहुंचकर माता के दर्शन किए और प्रसाद चढ़ाया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखकर मेले में दुकान लेकर आए व्यापारियों के चेहरे भी खिल गए थे। परंतु दो दिन पूर्व माता का डोला वापस जाने के बाद मेले की रौनक फीकी पड़ने लगी है, इसके पीछे केवल मां बाल सुंदरी देवी के डोले की वापसी ही नहीं है बल्कि मेले में बेहताशा महंगाई और गेहूं की कटाई इसकी मुख्य वजह हैं। मेले का टेंडर महंगा होने की वजह से मेले में पहुंचे खेल तमाशा, झूले और विभिन्न दुकाने लेकर आए व्यापारियों को काफी महंगी जगह दी गई है, इसी अनुपात में व्यापारियों ने भी अपने सामान और खेल तमाशो के रेट काफी हद तक बढ़ा दिए हैं। महंगाई की इसी मार के कारण मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का भी मेले से मोह भंग होने लगा है। मेले में भीड़ न होने की एक मुख्य वजह गेहूं की कटाई भी है, इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई जोर-जोर से चल रही है इसलिए ग्रामीण क्षेत्र से श्रद्धालु नहीं आ पा रहे हैं। पिछले दो-तीन दिन से केवल रात के समय शहरी क्षेत्र के लोग ही मेले में पहुंच रहे हैं और रात में भीड़ दिखाई दे रही है, परंतु दिन के समय मेंले की रौनक गायब है।