प्रतापनगर के विकास को लेकर नाबार्ड से सीधे वित्तीय अधिकार देने की मांग

देहरादून। पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक जीतमणि पैन्यूली ने प्रतापनगर क्षेत्र के सम्मानित नागरिकों की ओर से सरकार से नाबार्ड, एशियन बैंक व विश्व बैंक के माध्यम से सीधे विकास कार्यक्रम संचालित करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड जनता के नाम पर विकास के लिए ऋण देता है, लेकिन क्षेत्र से लगातार पलायन हो रहा है और सरकार धनराशि का उपयोग अन्य मदों में कर रही है, जबकि टिहरी बांध से प्रभावित जनता की मांगें आज भी अधूरी हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार टिहरी बांध के आसपास सौंदर्यीकरण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और रोजगार पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ऐसे में प्रतापनगर के लिए नाबार्ड को सीधे विकास प्रस्ताव भेजे जाने चाहिए, ताकि संवैधानिक अधिकारों के तहत क्षेत्र को धनराशि आवंटित हो सके। उन्होंने प्रत्येक परिवार को चार गाय पालन के लिए दो लाख रुपये सहायता और प्रति गाय दो हजार रुपये मासिक सहायता देने, साथ ही होम स्टे के लिए 30 लाख रुपये का ऋण व 10 लाख रुपये अनुदान देने की मांग की।

जीतमणि पैन्यूली ने कहा कि प्रतापनगर विश्व स्तर पर पैराग्लाइडिंग के लिए सबसे उपयुक्त स्थल है। दोबरा से कांडा खाल तक रोप-वे बनने से विदेशी पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और बारह महीने रोजगार सृजित होगा। झील किनारे टिहरी बांध प्रभावितों को दुकान व होटल के लिए प्लॉट देने और टीएचडीसी से हुए समझौतों को लागू करने की भी मांग की गई।

उन्होंने बताया कि 25 नवंबर को शीतकालीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए श्री शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने क्षेत्र को आशीर्वाद दिया। अब 3 जनवरी 2026 से प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पुनः उनसे आशीर्वाद लेने और प्रतापनगर के तीर्थ स्थलों—सेम नागराजा, बुड़कोट, डिंडायाली देवी, खेट पर्वत—को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना है कि इससे हरिद्वार-यमुनोत्री मार्ग पर आने वाले तीर्थयात्रियों को प्रतापनगर से जोड़कर क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार को नई दिशा मिलेगी।

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