सनातन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तथा सामाजिक समरसता का पर्व है होली: स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती

हरिद्वार। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परम अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि सृष्टि का स्वरूप बदल रहा है और धार्मिक पर्वों की मर्यादाएं समाप्त हो रही हैं। पवित्र पर्व को विसंगति प्रधान बनाया जा रहा है, यह सब कलयुग की समाप्ति के लक्षण हैं। वे आज विष्णु गार्डन स्थित श्री गीता विज्ञान आश्रम में आयोजित सद्भाव सम्मेलन में होली की शुभकामनाएं दे रहे थे।

होली को सनातन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण तथा सामाजिक समरसता का पर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने पर्वों की ऐसी श्रृंखला विकसित की थी कि समाज में ऊच नीच या छोटे बड़े का कोई भेदभाव न रहे और सभी पवित्र मन से एक दूसरे के गले मिलकर शुभकामनाएं दें। समय में आए परिवर्तन के कारण यह महान पर्व भी अब औपचारिकता बनता जा रहा है। होली के आगामी दिवस प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले कार्यक्रम को सनातन धर्म का गौरव बताते हुए उन्होंने कहा कि गीता विज्ञान आश्रम से जुड़े सभी भक्त एवं अनुयायी आज भी पर्व की पवित्रता को सम्मान दे रहे हैं। व्यापारी, सरकारी कर्मचारी/अधिकारी एवं कृषक वर्ग द्वारा संयुक्त रूप से एक दूसरे को गले मिलकर बधाइयां दीं तथा गुरु प्रसाद से एक दूसरे का मुह मीठा कराते हुए सभी के सुखद जीवन की कामना की। इससे पूर्व सभी भक्तों ने गुरुजी की चरण वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर आश्रमस्थ संत, वेदपाठी छात्र, गौ सेवक तथा माता बहने एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।   

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *