राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव के अवसर पर युवा संसद/तरुण सभा आयोजित

हरिद्वार। आज भूपतवाला स्थित राजकीय महाविद्यालय मेें संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखण्ड शासन के निर्देश के तहत ‘राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव-2024’ के अंतर्गत युवा संसद/तरुण सभा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक गिरी संस्थापक श्रवण सेवा संस्थान समिति तथा दीपांशु विद्यार्थी प्रदेश मंत्री, युवा मोर्चा रहेे। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये तन्मय वशिष्ठ ने छात्रों को उत्साहित करते हुए कहा कि ‘राष्ट्रीय युवा संसद महोत्सव 2024’ जैसे कार्यक्रम विचार व्यक्त करने और सार्वजनिक नीतियों पर बहस का उत्कृष्ट मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने इसे भारत सरकार का अनूठा प्रयास बताया, जिसे छात्रों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक गिरी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा कि संविधान को धार्मिक ग्रंथों की तरह सम्मानित करना आवश्यक है, क्योंकि यह लोकतंत्र की नींव है। विद्यालय को सरस्वती का मन्दिर मानते हुए उसकी गरिमा बनाए रखना चाहिए, और अनुशासित विद्यार्थी जीवन भविष्य की सुरक्षा का आश्वासन देता है। विषयों के साथ-साथ सामान्य ज्ञान पर भी ध्यान देना चाहिए, और माता-पिता तथा गुरु का सम्मान और सेवा करना हमारा कर्तव्य है। शिक्षा विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और पुरानी पुस्तकों को रद्दी में न देकर उन्हें संजोकर रखना चाहिए। मोबाइल का सदुपयोग करना आवश्यक है, हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए, और संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया है, जिसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की भूमिका समीर चौहान, लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका विशाल कुशवाहा, और संसदीय सचिव की भूमिका शौनक उनियाल ने निभाई।

महाविद्यालय में आयोजित युवा संसद कार्यक्रम की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। प्रतिपक्ष के सांसदों ने डिजिटल हैकिंग, खेल योजनाएँ, गंगा स्वच्छता, डिजिटल लाइब्रेरी और महाविद्यालय की सुविधाओं पर तीखे सवाल उठाए। सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने शांत और सटीक उत्तर दिए।

द्वितीय सत्र में ‘‘युद्धरत्त वैश्विक परिदृश्य में आन्तरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ भारत के संदर्भ में’’ पर परिचर्चा हुई, जिसमें युवा सांसदों ने तथ्यों के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजीव मेहरोत्रा ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया। आयोजन डॉ. भगवती प्रसाद पुरोहित की अध्यक्षता में हुआ, जबकि मंच संचालन डॉ. अजय प्रसाद उनियाल ने किया।

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