हरिद्वार। श्री गीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि कलियुग का अंत निकट है और अब तामस प्रधान युग समाप्त होकर सतयुग का आगमन होगा। उन्होंने बताया कि सतयुग में वही व्यक्ति प्रवेश करेंगे, जो तप, पवित्रता, दया और सत्य का पालन करते हैं, जबकि बाकी सृष्टि प्रकृति की विनाश लीला में विलीन हो जाएगी। महाकुंभ से लौटने के बाद आश्रम में भक्तों को सन्मार्ग की प्रेरणा देते हुए उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में अधर्म और तामसिक प्रवृत्तियों का विस्तार हो रहा है, जिससे मानव दानवों के स्वरूप में बदल रहे हैं, जो विनाश के लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि तृतीय महायुद्ध के बाद सभी आसुरी शक्तियों का अंत हो जाएगा और सात्विक विचारधारा वाले लोग ही सतयुग में प्रवेश करेंगे। प्रयागराज महाकुंभ की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भविष्य का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
स्वामी जी ने संत महापुरुषों की महत्ता बताते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों ने अनादिकाल से धर्म और संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन किया है, लेकिन वर्तमान समय की परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने भक्तों और शिष्यों को दया, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी और कहा कि जो शिष्य गुरु के आदेशों का पालन नहीं करता, उसकी अधोगति निश्चित है। उन्होंने कर्म को ही प्रधान बताते हुए कहा कि सत्कर्म करने वाले ही सतयुग में प्रवेश करेंगे और सृष्टि का पुनर्निर्माण होगा। अंत में, उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ से लाए त्रिवेणी के पवित्र जल से भक्तों को पावन स्नान कराया।