इस वर्ष एक अनोखा संयोग बन रहा है जब हिंदू समुदाय के लोग रंगों का पर्व होली मना रहे होंगे और मुस्लिम समुदाय रमजान के पाक महीने में रोजा रखकर इबादत में लीन होंगे। खास बात यह है कि इस बार होली शुक्रवार को पड़ रही है, जो इस्लाम में जुम्मे का खास दिन माना जाता है।
त्योहारों का असली मकसद आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द्र को बढ़ावा देना होता है। ऐसे में दोनों समुदायों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए संयम और सहयोग से त्योहार मनाना चाहिए।
होली हर्षोल्लास का पर्व है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाए। हिंदू समुदाय के लोगों को चाहिए कि वे किसी ऐसे व्यक्ति पर रंग न डालें जो इसे पसंद न करता हो, खासतौर पर उन लोगों को ध्यान में रखा जाए जो रोजे से हैं। इसी तरह, मुस्लिम समाज के लोगों को भी चाहिए कि वे इस पर्व की खुशी में किसी प्रकार की कटुता न आने दें।
रमजान पूरे महीने चलता है, जबकि होली साल में सिर्फ एक दिन आती है। दोनों ही त्योहारों का संदेश प्रेम, मेल-जोल और भाईचारे को बढ़ावा देना है। ऐसे में हम सभी को मिलकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए, जिससे समाज में सौहार्द बना रहे।
भारत विविधताओं का देश है, जहां हर धर्म, संस्कृति और परंपरा को सम्मान दिया जाता है। त्योहारों का मकसद न सिर्फ खुशियां बांटना होता है, बल्कि आपसी एकता को मजबूत करना भी होता है। इस साल होली और रमजान का संगम हमें यह सिखाता है कि भले ही परंपराएं अलग हों, लेकिन हमारी संवेदनाएं और आपसी प्रेम एक समान हैं।
इसलिए, इस बार होली और रमजान के मौके पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करेंगे और समाज में सौहार्द्र बनाए रखेंगे। रंगों की यह खुशी और इबादत की यह पाकीजगी मिलकर हमारे देश की गंगा-जमुनी तहजीब को और मजबूत बनाएगी।