हरिद्वार। खड़खड़ी स्थित संत मंडल आश्रम में परम पूज्य गुरु भगवान 1008 श्री जगदीश मुनि जी महाराज के 14वें निर्वाण दिवस पर विशाल संत समागम का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर आश्रम के श्री महंत एवं महामंडलेश्वर राम मुनि जी महाराज ने संत समाज को संबोधित करते हुए कहा कि इस पृथ्वी पर सतगुरु से बड़ा कोई मार्गदर्शक नहीं होता। सतगुरु भवसागर पार करने वाली नैया हैं, जिनका सान्निध्य हर जीव के लिए कल्याणकारी होता है। उन्होंने भगवान राम का उदाहरण देते हुए कहा कि जब स्वयं भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लिया, तब भी उन्हें सतगुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता हुई। उन्होंने गुरु भगवान जगदीश मुनि जी महाराज को परम तपस्वी और विद्वान संत बताते हुए कहा कि उन्होंने संपूर्ण जीवन राम नाम की महिमा का प्रचार-प्रसार किया।
इस अवसर पर संत समाज ने एक स्वर में राम नाम के महत्व को प्रतिपादित किया। संतों ने कहा कि जीवन में सुख-दुख, जन्म-मृत्यु अपरिहार्य हैं, लेकिन राम भजन ही आत्मा की वास्तविक शांति का माध्यम है। राम ही पीड़ा हैं, राम ही मरहम, और राम ही इसका उपचार हैं। सुख और दुख जीवन के दो पहिये हैं, किंतु जो व्यक्ति राम नाम का सहारा लेता है, वह कठिनाइयों को सहजता से पार कर लेता है। राम नाम का स्मरण मात्र भी जीवन को शांति प्रदान करता है और भवसागर से पार लगाने वाली नौका बनता है। त्रिकालदर्शी महर्षि वाल्मीकि ने भी राम कथा लिखकर इसका प्रमाण दिया, और अंत समय में पूतना और ताड़का जैसी राक्षसियों को भी राम नाम का सहारा मिला, जिससे वे मोक्ष प्राप्त कर सकीं।
महामंडलेश्वर कपिल मुनि महाराज ने इस अवसर पर कहा कि सच्चे मन से किया गया हरि भजन कभी निष्फल नहीं जाता। भगवान को सच्चे भाव से पुकारने वाला व्यक्ति कभी अकेला नहीं रहता, क्योंकि भगवान किसी न किसी रूप में उसकी सहायता के लिए अवश्य प्रकट होते हैं। गुरु का सच्चा मार्गदर्शन भक्तों के जीवन को सार्थक बना देता है।
इस संत समागम में महामंडलेश्वर चिद विलासानंद महाराज, स्वामी अनंतानंद महाराज, महंत ब्रह्मेश्वर महाराज, महंत कृष्ण स्वरूप महाराज, महंत सूरज दास महाराज, महंत कमलेशानंद महाराज, महंत नारायण दास पटवारी सहित अनेक संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी भक्तों को प्रसाद, वस्त्र एवं आशीर्वाद प्रदान किया गया। उपस्थित संत समाज ने परम पूज्य गुरु भगवान 1008 श्री जगदीश मुनि जी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।