उत्तराखण्ड में मूल निवास और भू-कानून को लेकर उठी आवाजें

हरिद्वार। पहाड़ी आर्मी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत एवं राज्य आंदोलनकारी जे०पी० बडोनी ने प्रेस क्लब में मूल निवास ,भू कानून, परिसीमन रोजगार, महिला सुरक्षा के लिये प्रेस वार्ता की।

इस दौरान उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उत्तराखंड में मूल निवास और भू-कानून को लेकर असमंजस जारी है। सरकार का दावा है कि भू-कानून पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, परंतु अभी तक कोई ठोस कानून लागू नहीं हुआ है। उत्तराखंड एकता मंच ने मांग की है कि पूरे राज्य में सख्त भू-कानून लागू हो।

संगठन का कहना है कि सरकार नगर पालिका को नगर निगम और गांवों को नगर निकाय बना रही है, जिससे यहां म्युनिसिपल एक्ट तो लागू होता है लेकिन भू-कानून नहीं। बाहरी लोगों को साढ़े बारह एकड़ तक जमीन खरीदने का अधिकार होने के कारण स्थानीय लोग रोजगार और संसाधनों से वंचित हो रहे हैं।

मंच ने संविधान की पांचवी अनुसूची के तहत मूल निवास का प्रावधान लागू करने की मांग की है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार, छात्रवृत्ति, और आरक्षण का लाभ मिल सके। आगामी 22 दिसंबर को नई दिल्ली के जंतर मंतर में ‘मूल निवास संसद’ का आयोजन किया जाएगा, जहां देश भर के पहाड़ी लोग एकत्र होंगे।

इस दौरान में नरेंद्र चैहान, प्रमोद नेगी, विनोद नेगी, कमलेश जेठी, कपिल जौनसारी आदि उपस्थित थे।

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