शहरों में जंगली जानवरों का आना अब आम बात हो गई है। रईस लोग अक्सर यह शिकायत करते हैं कि जंगली जानवर उनकी कलोनियों में घुस आते हैं। लेकिन असल सवाल यह है कि आखिर घुसपैठ कौन कर रहा है, जानवर या इंसान? जंगल, जो कभी वन्यजीवों का घर था, अब शहरीकरण और विकास परियोजनाओं की बलि चढ़ चुका है। इंसानों ने अपने फायदे के लिए जंगलों को काटकर महल और बड़े-बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट खड़े कर लिए। ऐसे में जानवर भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में मजबूर होकर मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
रईस और प्रभावशाली लोग, जिन्होंने जंगलों को उजाड़ा, अब जानवरों को अतिक्रमणकारी कह रहे हैं। यह दोहरा रवैया न केवल उनकी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी खतरे में डालता है। जंगलों का विनाश, जल स्रोतों का सूखना और जानवरों के आवास का खत्म होना, इन सबके पीछे इंसानी गतिविधियां जिम्मेदार हैं।
समस्या का समाधान यही है कि जंगलों की सुरक्षा की जाए, वन्यजीवों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाए जाएं और विकास कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान रखा जाए। आखिरकार, प्रकृति को बचाना ही मानवता की असली प्रगति है।