हरिद्वार। एक बार फिर निजी स्कूल की मनमानी और लापरवाही ने एक मासूम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शर्मनाक घटना के बाद महानगर व्यापार मंडल के ज़िला अध्यक्ष सुनील सेठी के नेतृत्व में दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और स्कूल प्रबंधन व शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान एक ज्ञापन सौंपकर स्कूल की मान्यता समाप्त करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
सेठी ने आरोप लगाया कि जिन स्कूलों में मोटी फीस वसूली जाती है, वहां आज बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता इस डर से चुप रहते हैं कि कहीं उनके बच्चों को स्कूल प्रशासन की कार्यवाही का सामना न करना पड़े। लेकिन जब स्कूल ही उत्पीड़न करने लगें, तो चुप रहना अन्याय को बढ़ावा देना है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा विभाग की लापरवाही और मिलीभगत से ही निजी स्कूल मनमानी पर उतारू हैं। सेठी ने मुख्य सचिव से मांग की कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले स्कूलों की मान्यता तुरंत रद्द की जाए और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाए।
इस अवसर पर पंडित अधीर कौशिक ने जिले के सभी स्कूलों में महिला सहायिकाएं अनिवार्य करने और सभी पुरुष स्टाफ का मानसिक एवं मेडिकल परीक्षण कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि चाहे वह कोई भी कर्मचारी हो, अगर वह बच्चों के संपर्क में है, तो उसकी पूरी जांच आवश्यक है।
वरिष्ठ व्यापारी नेता सतेंद्र झा और उपाध्यक्ष प्रीत कमल ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि महंगी फीस वसूलने के बावजूद अगर बच्चा सुरक्षित नहीं, तो ऐसे स्कूलों को बंद करना ही बेहतर है। उन्होंने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को मज़बूत करने और निजी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान रणवीर शर्मा, सचिन चौधरी, हरी मोहन भारद्वाज, गौरव खन्ना, महेश चन्द कालोनी, राजू जोशी समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।