गैस किल्लत के चलते अपना मेन्यू आधा करने को मजबूर होटल ढाबे,खाना भी हुआ मंहगा

देहरादून। पर्यटन और चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है। वैसे भी सर्दियां जाने के बाद उत्तराखण्ड में पर्यटकों की आमद शुरू हो गयी है। जिसके बाद गैस किल्लत का सीधा असर पर्यटकों की थाली पर दिखाई दे रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर देहरादून से लेकर हल्द्वानी, बागेश्वर से लेकर उत्तरकाशी और हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश तक साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। राज्य के होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट अब या तो सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं, या फिर महंगे दामों पर खाना परोसने को मजबूर हैं। पर्यटन सीजन के बीच आए इस संकट ने ना केवल कारोबारियों की कमर तोड़ी है, बल्कि लाखों की संख्या में आने वाले पर्यटकों के अनुभव को भी प्रभावित किया है।
 देहरादून में हालात ऐसे हैं कि कई प्रमुख ढाबों और रेस्टोरेंट्स को अपना मेन्यू आधा करना पड़ा है। उस दा ढाबा के मालिक गुरप्रीत सिंह बताते हैं कि गैस की भारी कमी के चलते उन्हें अपने 50 प्रतिशत व्यंजन हटाने पड़े हैं। अब वे लकड़ी के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं। गुरप्रीत का कहना है कि मजबूरी में मेन्यू आधा करना पड़ा. कई ऐसी डिश जो ज्यादा गैस लेती थीं, उन्हें बंद करना पड़ा है। जब गैस की समस्या दूर हो जाएगी तो फिर पूरे मेन्यू शुरू करेंगे। ऐसा नहीं है कि गुरप्रीत सिंह अकेले इस समस्या से जूझ रहे हैं। इस मामले में होटल सैफ्रन लीफ  के मैनेजिंग डायरेक्टर ईशान गुप्ता के अनुसार हमने लंबी कुकिंग वाली ग्रेवी और स्पेशल डिशेज को मेन्यू से हटा दिया है। हम अब केवल वही व्यंजन बना रहे हैं, जो कम समय और कम गैस में तैयार हो सकें। इसका सीधा असर पर्यटकों पर पड़ रहा है जिन्हें अब सीमित विकल्प मिल रहे है।

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