नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली की ओर से आयोजित 7वां नदी उत्सव नदियों के संरक्षण और उन्हें स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। उत्सव में विद्वानों, पर्यावरणविदों, नीति निर्माताओं, कलाकारों और नागरिकों ने यमुना की सांस्कृतिक विरासत, पारिस्थितिक चुनौतियों और सतत पुनरुद्धार पर विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर ‘नदी और जल से संबंध: जल संधि और जल प्रलय के दौर में भारत का जल धर्म’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। संहिता फाउंडेशन के सहयोग से हुए इस सत्र में अंग्रेजी साहित्यकार, लेखिका एवं चिंतक डॉ. राधिका नागरथ ने कहा कि नदियों को स्वच्छ और निर्बाध रूप से बहने देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने से नदियों को नहीं बचाया जा सकता, इसके लिए जनभागीदारी और जागरूकता जरूरी है। उन्होंने सीन, राइन और टेम्स जैसी नदियों का उदाहरण देते हुए नदी तटों पर बेहतर सुविधाएं विकसित करने तथा मानव अपशिष्ट को नदियों तक पहुंचने से रोकने के उपाय करने की जरूरत बताई। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने अपील की—‘नदियों को बहने दो, जल का सम्मान करो।’
कार्यक्रम में वक्ताओं ने नदियों पर अनियंत्रित निर्माण और पहाड़ों के विनाश पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। निर्वासित तिब्बती सरकार से संबद्ध शोधार्थी डॉ. तेनजिन डोल्मा, यमुना के लिए नागरिक परिषद के संयोजक डॉ. ओंकार मित्तल, लेखक विद्या भूषण रावत और जेसी बोस विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के प्रदीप डिमरी ने बढ़ती जल परियोजनाओं और नदियों पर बढ़ते मानवीय दबाव पर चिंता जताई।
कौशल किशोर ने नदी संरक्षण में कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों की भूमिका को रेखांकित करते हुए वैज्ञानिक जीडी अग्रवाल, स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद और स्वामी निगमानंद के गंगा संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को याद किया। वहीं निमिषा सिंह और ताशी डेकी ने हिमालय में ओक के पेड़ों की घटती संख्या और चीड़ के बढ़ते प्रभाव से उत्पन्न पारिस्थितिक असंतुलन का मुद्दा उठाया।
चर्चा के दौरान डॉ. तेनजिन डोल्मा ने बांध निर्माण के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि अत्यधिक निर्माण से पहाड़ों और नदियों की पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है। उन्होंने हिमनदों के पिघलने और बाढ़ जैसी समस्याओं के संदर्भ में गंगा और यमुना जैसी प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई।