ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती श्रीमृत्युंजय महाराज का समूचा जीवन अध्यात्म व साधना को था समर्पित: म.म. चिदविलासानंद सरस्वती

हरिद्वार। तीर्थनगरी की प्रख्यात धार्मिक सिद्धपीठ आनन्द वन समाधि के पीठाधीश्वर एवं श्री शाम्भव योगपीठ ट्रस्ट समिति रोडीबेल नीलधारा के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज चिदविलासानंद सरस्वती महाराज के पावन सानिध्य में ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती श्रीमृत्युंज्जय महाराज की 33वीं पुण्यतिथि महामंडलेश्वर व संतों-महंतों की गरिमामय उपस्थिति में श्रद्धांजलि अर्पित कर धूमधाम से तिथि मनाई। ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती महाराज की पुण्यतिथि महामंडलेश्वर स्वामी अन्नतानंद महाराज की अध्यक्षता व रविदेव शास्त्री के कुशल संचालन में सम्पन्न हुई। इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज चिदविलासानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती श्री मृत्युंजय महाराज का समूचा जीवन अध्यात्म व साधना को समर्पित रहा उन्होंने जीवन पर्यंत मां भागीरथी के तट पर आसन लगाकर विश्व के कल्याण के लिए हवन यज्ञ कर लोक शांति की कामना की। ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद महाराज ने श्रद्धालु भक्तों को अध्यात्म और साधना की ओर आकर्षित करने का कार्य किया। उन्होंने अपने श्रद्धालु भक्तों को सनातन धर्म व संस्कृति की रक्षा का पाठ पढ़ाया। महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सतगुरु का जन्म केवल अपने शिष्यों के कल्याण के लिए होता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद महाराज ने अपने शिष्य को सत्मार्ग पर चलाकर चलने का रास्ता बताया और मानव जीवन के कल्याण की राह दिखाई। ब्रह्मलीन प्रेमानंद महाराज अनवरत साधना और तपस्या में रहकर लोक कल्याण की कामना करते थे। महामंडलेश्वर ललित आनंद गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद महाराज त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने जीवन पर्यंत अपने शिष्यों को श्रद्धालु भक्तों को देश प्रेम अध्यात्म रहा बताई। आनंदवन समाधि के मुख्य ट्रस्टी पूर्व राज्यसभा सांसद रविंद्र किशोर सिन्हा ने सभी संतो महंतों का माल्यार्पण कर स्वागत करते हुए कहा कि सदगुरुदेव भगवान व संतांे-महंतों के आशीर्वाद से ही शिष्यों के जीवन का कल्याण होता है। हमें अपने सदगुरुदेव के बताएं मार्ग पर चलकर विश्व के कल्याण की कामना करना चाहिए और हमें मानव जीवन का सदुपयोग कर मानव कल्याण की बात सोचनी चाहिए। ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानंद सरस्वती महाराज को साध्वी प्राची अरुण दास, महामंडलेश्वर विष्णु दास, प्रेमानंद, गोविंद दास, महंत दुर्गादास, महंत केशवानंद, महंत शुभम गिरि, प्रमोद गिरि, स्वामी आत्मानंद, बाबा देवआनंद, महंत नारायणदास पटवारी, सुभाष त्यागी, समाजसेवी मास्टर सतीश चंद शर्मा, विकास लेखी, मनोज शर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

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