हरिद्वार |देवभूमि हरिद्वार के वैरागी कैंप में भारतीय संस्कृति और ऋषि परंपरा के स्वर्णिम अध्याय का भव्य शुभारंभ हुआ। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा वंदनीया माताजी एवं अखंड दीपक के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर ‘ऋषि क्षेत्र’ का ऐतिहासिक अनावरण किया गया। यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ आधुनिक युग में प्राचीन ऋषि-ज्ञान की प्रासंगिकता को प्रभावी रूप से रेखांकित करता है।
अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री एवं सांसद श्री अजय भट्ट ने कहा कि पूज्य गुरुदेव द्वारा कठिन साधना और तपश्चर्या से बोया गया बीज आज विराट वटवृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है। स्वयं को तपाकर मानवता को दिया गया उनका संदेश अमर है, जो अखंड दीप की भांति विश्व के कोने-कोने में प्रकाश फैलाता रहेगा। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का प्रत्येक परिजन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मुस्कान के साथ सेवा में संलग्न रहता है, जो उनके भीतर रचे-बसे कर्मयोग का प्रमाण है।
मुख्य सचिव श्री आनंद वर्धन ने कहा कि आध्यात्मिकता जीवन को संतुलन देने की विधि है और यही जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करती है। वही विद्या सार्थक है, जो चरित्र निर्माण और लोक कल्याण की भावना को विकसित करे। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषियों ने समाज के बीच रहकर जीवन को ऊँचा उठाने की शिक्षा दी और गायत्री परिवार के अधिष्ठाता आचार्यश्री ने धर्म को चरित्र और कर्तव्य से जोड़कर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि युग बदलता नहीं, युग बदला जाता है। उत्तराखंड को तपोभूमि के साथ सांस्कृतिक चेतना की भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि पर्वत स्थिरता और नदियां प्रवाह सिखाती हैं। राज्य सरकार का दृष्टिकोण है कि विकास प्रकृति के साथ सामंजस्य में हो और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज का युवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का अर्थ और उद्देश्य भी तलाश रहा है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पूज्य गुरुदेव ने सभी को एक सूत्रबद्ध भावधारा से जोड़ा है। आज का समय आध्यात्मिक और सामाजिक—दोनों दृष्टियों से अत्यंत मूल्यवान है। उन्होंने वंदनीया माताजी के दिव्य संदेश का स्मरण कराते हुए कहा कि भारत को सर्वसमर्थ बनाने के लिए भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा और प्राचीन ऋषि परंपरा के पुनर्जीवन पर विशेष बल दिया।
विश्व हिंदू परिषद के श्री मिलिंद परांडे ने कहा कि गायत्री परिवार ने सभी जाति और धर्मों को एक सूत्र में पिरोने का भगीरथ प्रयास किया है। इससे पूर्व मेयर श्रीमती किरण जैसल सहित अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और साधना, सेवा, संस्कार तथा राष्ट्र-निर्माण के क्षेत्र में गायत्री परिवार के कार्यों को प्रेरणास्पद बताया।
कार्यक्रम के दौरान मंचासीन अतिथियों सहित श्री नितिन गौतम, श्री तरुण वशिष्ठ आदि को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न, युगसाहित्य, गंगाजली एवं गायत्री महामंत्र अंकित उपवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित, एसपी सिटी श्री अभय प्रताप सिंह, एचआरडीए सचिव श्री मनीष कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट श्रीमती कुश्म चौहान सहित प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री योगेंद्र गिरि तथा देशभर से आए हजारों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।