हरिद्वार में सजा काव्य का रंग, कवियों ने रचनाओं से उठाए सामाजिक सरोकारों के मुद्दे

हरिद्वार। अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सेवा समूह, हरिद्वार के तत्वावधान में श्री कृष्ण कृपा धाम, भीमगोड़ा में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय कवियों के साथ अन्य शहरों से आए साहित्यकारों ने भी सहभागिता की और अपनी रचनाओं के माध्यम से विभिन्न सामाजिक, पारिवारिक एवं राष्ट्रीय विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेविका रेखा सिंघल ने की, जबकि संयोजन पूर्व उपनिदेशक शिक्षा डॉ. पुष्पारानी वर्मा एवं संचालन श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान के संस्थापक डॉ. अशोक गिरि ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कु. वृंदा शर्मा ने सरस्वती वंदना तथा कु. अपराजिता ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

 

काव्य पाठ का शुभारंभ कर्मवीर सिंह के लोकगीतों से हुआ। डॉ. श्याम बनौधा ने गजल के माध्यम से हिंदी भाषा के विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। अमित कुमार ने भोजन व्यवस्था पर आधारित व्यंग्य रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को गुदगुदाया।

रेखा सिंघल, डॉ. पुष्पारानी वर्मा, प्रेम शंकर ‘प्रेमी’, पुष्पराज धीमान, डॉ. विजय त्यागी, दीनदयाल दीक्षित, सुरेंद्र कुमार, आचार्य अरुण शुक्ल एवं डॉ. अशोक गिरि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समकालीन सामाजिक, पारिवारिक और राष्ट्रीय चुनौतियों को स्वर दिया। डॉ. सुशील त्यागी एवं साधुराम ‘पल्लव’ ने छंदबद्ध रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।

युवा कवि अभिषेक भारद्वाज ने शिक्षाप्रद रचना प्रस्तुत की, जबकि डॉ. प्रशांत कौशिक ने प्रेम रस से ओतप्रोत काव्य पाठ किया। सुमन भारद्वाज, राजकुमारी और वृंदा शर्मा के मधुर गीतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं अपराजिता की ओजपूर्ण रचनाओं ने वातावरण में ऊर्जा का संचार किया।

मुख्य वक्ता डॉ. एन.पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा के समुचित विकास के लिए व्याकरण का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. पुष्पारानी वर्मा ने सभी कवियों, श्रोताओं एवं आश्रम प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए समूह की अंतरराष्ट्रीय पहचान पर प्रसन्नता जताई और सभी सदस्यों को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर डॉ. अशोक गिरि की पंक्तियां— “गरीबी को हर रंग में देखा है मैंने…” तथा अभिषेक भारद्वाज की रचना— “अभी तो एक शुरुआत हुई…” को श्रोताओं ने विशेष सराहना दी। वहीं डॉ. सुशील त्यागी की प्रेरणादायी पंक्तियां— “चल-चल-चल, तू गीत गाता चल…” ने कार्यक्रम को सकारात्मक संदेश के साथ नई ऊंचाई प्रदान की।

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