हरिद्वार। श्री करौली शंकर महादेव धाम के प्रमुख श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु करौली शंकर दास जी महाराज का 62वां जन्मोत्सव मिश्री मठ हरिद्वार, रायवाला और कानपुर स्थित आश्रमों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के साथ अमेरिका, यूरोप और चेक गणराज्य सहित कई देशों से आए श्रद्धालु शामिल हुए, जबकि लाखों भक्तों ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मिश्री मठ हरिद्वार में डॉ. उमेश सचान तथा कानपुर आश्रम में अनिरुद्ध शर्मा के संयोजन में गुरु पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार, ध्यान साधना, आध्यात्मिक प्रवचन और आशीर्वाद सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
अपने संबोधन में करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मबोध, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति है। उन्होंने कहा कि ध्यान, साधना और दृढ़ संकल्प के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है तथा मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जन्म साधारण घटना है, लेकिन उसके कर्म और आचरण ही उसे असाधारण बनाते हैं। श्रद्धालुओं का स्नेह और विश्वास धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण तथा लोककल्याण के कार्यों के लिए प्रेरणा देता है।
संस्था के अनुसार, करौली शंकर दास जी महाराज अपने प्रवचनों में स्मृति महाविज्ञान और शिव तंत्र जैसे विषयों के माध्यम से आत्मचिंतन और आध्यात्मिक विकास का संदेश देते हैं। धाम में संचालित तंत्र क्रिया योग साधना पद्धति के जरिए गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों को भी ध्यान, योग और वैदिक साधना से जोड़ा जा रहा है।
संस्था ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश-विदेश से श्रद्धालुओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है और ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यमों से लाखों लोग नियमित रूप से प्रवचनों एवं ध्यान सत्रों से जुड़ रहे हैं। संस्था के अनुसार, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, समाजसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में योगदान के लिए करौली शंकर दास जी महाराज को हाल ही में भारत गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया गया।